अनूठी मुहिमः पूर्व सैनिक विक्रम सिंह भंडारी ने साबित किया कि फौजी कभी रिटायर नहीं होता
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कहते हैं फौजी कभी रिटायर नहीं होता। एक फौजी को ट्रेनिंग ही इस तरह की होती है कि वह देश और समाज के लिए हर स्थिति में काम आए। तमाम ऐसे उदाहरण हैं, जब सेवानिवृत्त हो चुके सैनिकों ने सामाजिक जीवन में भी मिसाल कायम की हैं। इस कड़ी में एक नाम और जुड़ा है छह-गढ़वाल रायफल से रिटायर हुए विक्रम सिंह भंडारी का।
जो इन दिनों अपनी मुहिम ‘घर-घर फौजी, हर घर फौजी’ को लेकर चर्चा में हैं। विक्रम ने अपनी इस मुहिम को मुकाम तक पहुंचाने के लिए रानीपोखरी में सेना भर्ती पूर्व प्रशिक्षण शुरू किया है। इस काम में उनका साथ दे रहे हैं भूतपूर्व सैनिक विनोद जोशी, सुनील यादव और प्रशांत रावत। इस वक्त उनके कैंप में सौ से ज्यादा युवा निशुल्क ट्रेनिंग ले रहे हैं।
विक्रम लंबे समय से इस बात को लेकर फिक्रमंद थे कि क्षेत्र के युवाओं में नशे की प्रवृत्ति तेजी से फैल रही है। रही-सही कसर मोबाइल और इंटरनेट ने पूरी कर दी है। युवा अपने मकसद से भटक रहे हैं। वे अपनी सेहत पर भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। तब उन्होंने अपने बूते इन युवाओं के लिए कुछ कर गुजरने की मंशा से ‘घर-घर फौजी, हर घर फौजी’ मुहिम शुरू की। इसके तहत वे रोज सुबह-शाम युवाओं को दो घंटे ट्रेनिंग देते हैं। उनकी यह ट्रेनिंग क्लास सुबह साढ़े बजे और शाम को पांच बजे शुरू होती है।
ट्रेनिंग स्थल के लिए उन्होंने गांव की हाट को चुना है। जिसके पास जाखन नदी बहती है। जहां वे युवाओं को वही वातावरण देते हैं, जैसा की सेना की ट्रेनिंग के दौरान दिया जाता है। बकौल विक्रम, इस मुहिम में फौजी शब्द जुड़ा है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि यहां वही आए, जिसको फौजी बनना है। बल्कि हमारा मकसद तो युवाओं को एक स्वस्थ और मजबूत शरीर का मालिक बनना है। कोई भी युवा इस मुहिम से जुड़ेगा तो नशे से खुद-ब-खुद दूर हो जाएगा।
कौन हैं विक्रम सिंह भंडारी
रानीपोखरी निवासी स्व. रतन सिंह भंडारी और कमला देवी के पुत्र विक्रम बचपन से ही देश सेवा का सपना पाले थे। 1998 में अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान ही सेना में भर्ती हो गए थे। पिता भी फौज में थे तो बचपन से ही विक्रम फौजियों का जीवन जीना चाहते थे। 2015 में विक्रम ने 16 साल सेवा देने के बाद सेवानिवृत्ति ले ली। तब से वे तमाम सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। उनकी मुहिम ‘घर-घर फौजी, हर घर फौजी’ की इन दिनों क्षेत्र में हर कोई प्रशंसा कर रहा है।
नशे के लिए बदनाम हो रहा क्षेत्र
जिस उम्र में युवाओं की मुट्ठियां जोश ने तनी होनी चाहिए, उस उम्र में अगर उसकी नसों में नशा दौड़ने लगे तो पीढ़ियां बर्बाद हो जाती हैं। न्याय पंचायत क्षेत्र रानीपोखरी भी नशे के इस जाल से अछूता नहीं है। बल्कि यूं कहा जाए कि ये क्षेत्र धीरे-धीरे नशे के लिए बदनाम हो रहा है तो गलत नहीं होगा। विक्रम अपनी मुहिम के जरिए क्षेत्र की इस छवि को भी बदलना चाहते हैं।
युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक रक्षक दल विभाग की ओर से भी समय-समय पर ऐसे कैंप आयोजित किए जाते हैं। रानीपोखरी में भी हम एक कैंप कर चुके हैं। ये अच्छी बात है कि पूर्व सैनिक विक्रम सिंह भंडारी इस मुहिम को और आगे बढ़ा रहे हैं। इन कैंपों का उद्देश्य यही होता है कि जब युवा सेना में भर्ती होने जाएं तो वे पहले से मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हो जाएं।
- विनीता नौटियाल, श्रेत्रीय युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी, डोईवाला ब्लाक