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155 साल से विलुप्त पौधे का पता चला
प्रवेश कुमारी/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 11 Jan 2014 11:38 AM IST
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विशेषज्ञों ने एक ऐसी पौध प्रजाति की पुनर्खोज का दावा किया है, जिसे आखिरी बार वर्ष 1857 में देखा गया था। जेंटियाना सैजिनोयड्स बर्किल नाम की इस पौध प्रजाति को विलुप्त मानते हुए वर्ष 1997 में आईसीयूएन की रेड लिस्ट में भी शामिल किया गया था। 155 साल बाद इसके दर्शन निर्धारित ऊंचाई से 160 मीटर ऊंचाई पर हुए हैं।
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वास स्थल बदलने की वजह जलवायु परिवर्तन मानी जा रही है। इस प्रजाति के फिर से दिखने पर विशेषज्ञ उत्साहित हैं। उनका कहना है कि कई अन्य ऐसे पौधे हो सकते हैं, जिनका वास स्थल बदला होगा। ऐसे में गंभीर खोज की जरूरत है। फिलहाल जेंटियाना सैजिनोयड्स को दुर्लभ मानते हुए इसके चार नमूने सेंट्रल नेशनल हरबेरियम (सीएनएच) हावड़ा भी भेजे गए हैं।
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बागेश्वर की सुंदरढूंगा वैली में मिली पौध
जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय की डिपार्टमेंट आफ बायोलाजिकल साइंसेज की टीम ने 2012 में 15-22 जून के बीच कुमाऊं के बागेश्वर जिले में स्थित सुंदरढूंगा वैली का वानस्पतिक सर्वेक्षण किया था, जहां इस प्रजाति के दर्शन हुए। साहित्य, विशेषज्ञ राय और समान प्रजातियों से तुलना के आधार पर इसे सबके सामने लाया गया।
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साइंस एंड टेक्नोलाजी कांग्रेस में रखी गई पुनर्खोज
उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकास्ट) की तरफ से आयोजित उत्तराखंड स्टेट साइंस एंड टेक्नोलाजी कांग्रेस में जेंटियाना सैजिनोयड्स बर्किल की खोज सामने रखी गई। जीबी पंत कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट आफ बायोलाजिकल साइंसेज का यह रिसर्च पेपर पढ़ा गया।