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बाल वैज्ञानिकों ने दिया ऊर्जा संरक्षण का संदेश
अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Thu, 31 Oct 2013 06:02 PM IST
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राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् उत्तराखंड की ओर से आयोजित नवम राज्य स्तरीय विज्ञान महोत्सव का तीसरा दिन विज्ञान ड्रामा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम रहा। बाल वैज्ञानिकों ने विज्ञान ड्रामा के माध्यम से हरित क्रांति और ऊर्जा संरक्षण का संदेश दिया। छात्राओं ने रंगारंग लोक संस्कृति की छटा बिखेरी।
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श्री भरत मंदिर इंटर कालेज में आयोजित महोत्सव के द्वितीय सत्र का एससीआरटी के अपर निदेशक डा. एसके शील ने विधिवत उद्घाटन किया। ड्रामा में विभिन्न जनपदों की टीमों द्वारा अपने विषयों पर विज्ञान ड्रामा का प्रदर्शन किया गया। जनपद नैनीताल की टीम ने अपने ड्रामा के माध्यम से हरित ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के सद्पयोग की जानकारी दी।
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बाल वैज्ञानिकों ने ऊर्जा के विभिन्न वैकल्पिक संसाधनों के प्रयोग के प्रति दर्शकों को जागरूक किया। साथ ही दर्शकों को ऊर्जा संरक्षण का संदेश दिया। हरिद्वार जनपद ने जल प्रदूषण से होने वाली हानि से सचेत करते हुए शुद्ध जल में आ रही गिरावट पर चिंता जताई।
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उन्होंने ड्रामा के माध्यम से जल प्रदूषण से भविष्य में होने वाली आपदाओं को लेकर सामाजिक चेतना जगाने का प्रयास किया। इस बीच तीर्थनगरी के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने विज्ञान प्रदर्शनी का भ्रमण किया। साथ ही निर्णायकों ने 455 बाल वैज्ञानिकों के मॉडलों का मूल्यांकन कार्य पूरा किया।
इसके बाद जीजीआईसी और हरिचंद बालिका इंटर कालेज की छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से दर्शकों का मनोरंजन किया। डांस इंडिया डांस की प्रतिभागी वैष्णवी झा ने ‘बांके बिहारी की देख छटा, मेरो मन है गयो अटा पटा..’ गाने पर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की वाहवाही लूटी।
इस अवसर पर एससीआरटी के उपनिदेशक आरपी सिंह, प्रधानाचार्य डीबीपीएस रावत, डा. वीसी गुप्ता, डा. केके उपरेती, मनोज शुक्ला, एसपी वर्मा, एसके श्रीवास्तव, पूनम शर्मा, सतीश धौलाखंडी, चंदा ममगांई, सोहन सिंह रावत, गोविंद सिंह रावत, रंजन अंथवाल, अनिल मैठानी आदि मौजूद थे।
बाल वैज्ञानिकों को नहीं मिला लाभ
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के सभी राजकीय विद्यालयों को विज्ञान सामान खरीदारी के लिए 25 हजार रुपये सालाना दिए जाते हैं। साथ ही इसमें से पांच हजार रुपये विज्ञान प्रदर्शनी के लिए विशेष रूप से दिए जाने का प्रावधान हैं। मगर, टिहरी के बाल वैज्ञानिकों को इसका लाभ नहीं दिया गया। बाल वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने अपने जेब के पैसों से मॉडल तैयार किए और अपने खर्चे पर महोत्सव में प्रतिभाग करने ऋषिकेश पहुंचे हैं।
टिहरी के 35 बच्चों का भविष्य अधर में!
विभागीय तालमेल में कमी के कारण टिहरी जनपद के 19 विद्यालयों के 35 बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। जनपद की अर्द्धवार्षिक परीक्षा 28 अक्तूबर से प्रारंभ होनी थी। मगर, इसी दौरान विज्ञान महोत्सव का आयोजन कर दिया गया। जिससे प्रतिभाग कर रहे बच्चों के अर्द्धवार्षिक पेपर छूट गए।
जिससे बाल वैज्ञानिकों को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। उधर, टिहरी सीईओ ने बताया कि इसके लिए विद्यालय प्रधानाध्यापकों को महोत्सव के बाद अपने स्तर से परीक्षाएं लिए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं।