दून में यहां देखिए बड़े पर्दे पर गढ़वाली फिल्म
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्षेत्रीय सिनेमा में रुचि रखते हैं तो यह खबर आपके लिए है। अब सप्ताह में तीन दिन गढ़वाली सिनेमा के नाम होंगे। नटराज सिनेमा में मार्निंग शो में जून के तीसरे सप्ताह से गढ़वाली फिल्में दिखाई जाएंगी।
इस फेस्ट में दर्शक वर्ष 1973 में बनी गढ़वाली सिनेमा की पहली फिल्म ‘जग्वाल’ से लेकर एक साल पहले बनी ‘राजुला’ तक देख पाएंगे।
यूएफडी (उत्तराखंड फिल्म दर्शन) क्लब गढ़वाली संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए यह फेस्ट शुरू कर रहा है। जून के तीसरे सप्ताह से शुक्रवार, शनिवार और रविवार को सुबह साढ़े नौ बजे (पहला शो) का शो गढ़वाली फिल्म का होगा।
फेस्ट में 70 एमएम सेल्यूलाइड स्क्रीन से लेकर सीडी तक में बनी सभी तरह की फिल्में दिखाई जाएंगी।
रि-कंडीशनिंग से सहेजी जाएंगी फिल्में
फेस्ट की सबसे खास बात यह होगी कि दिखाए जाने से पहले फिल्मों की रि-कंडीशनिंग होगी। इसके जरिए इन्हें संरक्षित किया जाएगा। दरअसल गढ़वाली सेल्यूलाइड फिल्मों के प्रिंट बेहद खराब हो चुके हैं।
रि-कंडीशनिंग के जरिए इनके मौजूदा स्वरूप को संरक्षित किया जाएगा, ताकि भविष्य में भी इन्हें मनमुताबिक इस्तेमाल किया जा सके।
एक फिल्म की रि-कंडीशनिंग में ही बीस हजार से अधिक का खर्च है। फिल्में सही स्थिति में आ जाएंगी तो कम से कम मेकर्स को तो उनकी फिल्म सुरक्षित मिल सकेगी। इसके बाद इन्हें म्यूजियम में रखा जाएगा। जहां से कोई भी उन्हें देख सकेगा। सप्ताह में तीन दिन यह फिल्में दिखाई जाएंगी। हमें भी पता लगेगा कि लोग रीजनल सिनेमा को कितना पसंद करते हैं।
-जीएस थापा, चेयरमैन, यूएफडी क्लब
पहले ही होगी टिकटों की बुकिंग
फिल्मों के लिए टिकट की एडवांस बुकिंग की जा सकेगी। लोगों को जुटाने के लिए आयोजक क्षेत्रीय संस्थाओं के सहयोग से फेस्ट का प्रचार भी करेंगे। फिल्म के शो से अच्छी कमाई होती है तो पैसा फिल्म मेकर्स को भी दिया जाएगा।
दिखाई जाएंगी यह फिल्में
जग्वाल, बेटी-ब्वारी, फ्यूली, बंटवारू, मेरी गंगा होली तो मैमा आली, औंसी की रात, सिपैजी, किस्मत अपणी-अपणी, राजुला आदि।