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पैकेज की दौड़ के बजाय शोध व अनुसंधान पर जोर दें छात्र: रमेश पोखरियाल निशंक

Tue, 01 Dec 2020 09:42 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर(पौड़ी)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर(पौड़ी) Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 01 Dec 2020 09:42 PM IST
सार

  • गढ़वाल विवि के दीक्षांत समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने दिया ‘स्टे इन इंडिया और स्टडी इन इंडिया’ का नारा
  • साल भर में एक बार पुरातन छात्र सम्मेलन आयोजित करने के दिए कुलपति को निर्देश 

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Garhwal University Convocation:  Union Education Minister Ramesh Pokhriyal Nishank Message to students
रमेश पोखरियाल निशंक (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

गढ़वाल केंद्रीय विवि के वर्चुअल मोड पर आयोजित दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने छात्र-छात्राओं से पैकेज की दौड़ में शामिल होने के बजाय शोध और अनुसंधान पर जोर देने को कहा।

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उन्होंने कहा कि सिर्फ नौकरी के लिए डिग्री न लें, बल्कि शोध और अनुसंधान की दिशा में काम करें। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने ‘स्टे इन इंडिया और स्टडी इन इंडिया’ का नारा देते हुए कहा कि शिक्षा के लिए किसी को देश से बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बल्कि अन्य देश के लोग भारत में आएंगे। शिक्षा ग्रहण करने वालों का भारत के विकास में योगदान देना जरूरी है।
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मंगलवार को गढ़वाल विवि के दीक्षांत समारोह में ऑनलाइन छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि वह भी गढ़वाल विवि के छात्र रहे हैं। इससे उनकी कई यादें जुड़ी हुई हैं। उन्होंने विवि कुलपति को साल भर में एक बार पुरातन छात्र सम्मेलन आयोजित करने के निर्देश दिए। 

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नई शिक्षा नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर की है

उन्होंने कहा कि पुरातन छात्र विद्या दान, अर्थदान या समयदान जो भी संभव हो, उसका दान करे। उनका योगदान संस्थान को सक्षम बनाने में सहयोगी रहेगा। डॉ. निशंक ने कहा कि गढ़वाल विवि हिमालय में बसा बेहतर संस्थानों में से एक है। यहां अपार संभावनाएं हैं।

विज्ञान क्षेत्र हो या आध्यात्म या फिर पर्यावरण, गढ़वाल विवि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। इस दौरान नई शिक्षा नीति को लेकर उन्होंने कहा कि मैकाले की शिक्षा नीति ने जड़ों से विमुख कर दिया था। इसको नई शिक्षा नीति में खत्म किया गया है। इसमें विज्ञान, आध्यात्म, पर्यावरण, दर्शन सब कुछ है।

यह नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। कहा कि अब यदि किसी छात्र की पढ़ाई बीच में छूटती है, तो वह कभी भी इसे पूरा कर सकता है। वर्तमान मेें भारत 128 देशों के साथ पारस्परिक शोध कर रहा है। अभी और बेहतर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विवि ने जो पांच गांव गोद लिए हैं, वह आदर्श गांव बनने चाहिए। 

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