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भूरा का 'चक्रव्यूह' नहीं भेद पाई दून पुलिस
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 16 Mar 2015 05:34 PM IST
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देहरादून पुलिस की कस्टडी से 15 दिसंबर 2014 से फरार गैंगस्टर अमित मलिक उर्फ भूरा ने तीन राज्यों की पुलिस को नाकों चने चबवा दिए।
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पुलिस के दिग्गज सर्विलांस से लेकर सौदेबाजी तक का फंडा अपना चुके हैं, लेकिन भूरा को पकड़ना तो दूर उसकी लोकेशन तक पता नहीं चल पाई है। सोमवार को भूरा की फरारी के 90 दिन हो रहे हैं, लेकिन पुलिस पुख्ता तौर पर कुछ कहने की स्थिति में नहीं है।
रुड़की जेल कांड के आरोपी भूरा की फरारी के मामले में दून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय रौतेला को कुर्सी गंवानी पड़ी थी। इसके बाद हरकत में आए डीजीपी ने उत्तराखंड, दिल्ली और यूपी पुलिस के साथ आपरेशन भूरा की कामयाबी के बड़े दावे किए थे।
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नोएडा में कंट्रोल रूम बनाने के साथ डीआईजी, एसटीएफ और एसएसपी दून को वहां कैंप कराया गया। यूपी और उत्तराखंड पुलिस ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए भूरा पर पांच-पांच लाख का इनाम घोषित किया था। कुछ दिन तो ठीक चला, लेकिन श्रेय लेने की होड़ में तीनों राज्यों की पुलिस की राह बदल गई।
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भूरा मामले में जो कामयाबी हाथ लगी भी, वह मैनेजमेंट का हिस्सा रही है। पुलिस कितना भी दावा करे, लेकिन सच तो यही है कि भूरा गैंग ने ही दबाव कम करने के लिए पुलिस को कामयाबी की राह दिखाई।
पहली कड़ी में सरकारी असलाह लौटाए गए है और फिर एक-एक 11 मददगार कानून की गिरफ्त में आते चले गए, लेकिन भूरा की सुराग नहीं मिल पाया। नाकामयाबी का असर यह है कि ऑपरेशन भूरा को लेकर अब न तो सरकार और न ही पुलिस गंभीर नजर आ रही है।
एनसीआर में भूरा की मौजूदगी
फरार होने के बाद भूरा दिल्ली एनसीआर से बाहर नहीं गया है। पुलिस की माथापच्ची का नतीजा कम से कम यही इशारा कर रहा है। दिल्ली पुलिस के लिए काफी समय चुनौती बने एक लाख रुपये के इनामी नीरज बवाना और भूरा के साथ होने के कयास भी पुलिस लगा रही है। तमाम ऑफर के बाद भी इस गैंग में सेंधमारी करने में पुलिस विफल रही है।
भूरा की जगह अब मुकीम
भूरा के मामले में यूपी पुलिस से कामयाबी की ज्यादा उम्मीद थी, लेकिन वेस्ट यूपी की पुलिस और एसटीएफ उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। इसी बीच मुकीम गैंग की ताबड़तोड़ घटनाओं ने वेस्ट यूपी पुलिस की प्राथमिकता बदल दी है। अब हर कि सी की निगाह मुकीम गैंग पर टिकी है।
बिखर गई आपरेशन टीम
आपरेशन भूरा में जुटी उत्तराखंड पुलिस की टीम बिखर गई है। डीआईजी और एसएसपी भूरा को दरकिनार कर अपने कामकाज में जुट गए हैं। अपर पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर को हटाकर कुंभ मेला ड्यूटी में भेज दिया गया। आपरेशन की कमान संभालने वाले आईपीएस सदानंद दांते अब एसटीएफ से हट गए हैं।
आपरेशन भूरा में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती गई है। प्रयासों का ही नतीजा रहा है कि उसे छुड़ाने वाले अधिकतर गुर्गे पकड़े गए हैं। अमित उर्फ भूरा और उसका साथी सचिन खोखर पर कार्रवाई चल रही है। हाल में ही सचिन पुलिस को चकमा दे गया। भूरा भी ज्यादा दिन नहीं भाग पाएगा।
- बीएस सिद्धू, पुलिस महानिदेशक