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भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में अटकी गंगोत्री धाम परियोजना
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 13 Sep 2016 08:52 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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भागीरथी इको सेंसिटिव जोन ने गंगोत्री धाम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को अटका दिया है।
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इको सेंसिटिव जोन का जोनल मास्टर प्लान पास नहीं होने के कारण डेढ़ साल बाद भी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाई है। एक हजार करोड़ बजट की धरासू से गंगोत्री के बीच शुरू की गई इस परियोजना में चारधाम का सबसे खतरनाक भूस्खलन जोन भी आता है।
धरासू से गंगोत्री 124 किमी लंबी गंगोत्री धाम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना प्रदेश का इकलौता प्रोजेक्ट है, जिसका काम नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रकचर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएचआईडीसीएल) को सौंपा गया है। परियोजना के पूरा होने से गंगोत्री का सफर बहुत आसान हो जाएगा।
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इसके साथ ही राह में पड़ने वाले भूस्खलन जोन और अंधे मोड़ों का भी ट्रीटमेंट हो जाएगा। दुर्घटनाएं न्यूनतम हो जाएंगी लेकिन भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के मास्टर जोनल प्लान के चक्कर में योजना रुक गई है। इस परियोजना का 94 किमी हिस्सा भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में पड़ रहा है। इसका चौड़ीकरण होना है।
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इस क्षेत्र में दो बाईपास बनने हैं और भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट किया जाना है। एक बाईपास सुक्कीवाला बाईपास और दूसरा बाईपास खूनी गदेरे के पास बनना है। हर बारिश में गदेरे के उफान के कारण बड़ी तबाही मचती है और लोगों की जान जाती है। इसी के नेताला गर्म पानी क्षेत्र में पांच भूस्खलन जोन आते हैं।
वन भूमि हस्तांतरण न होने की वजह से काम अटका हुआ है। भागीरथी इको सेंसिटिव जोन का जोनल मास्टर प्लान पास न होने के कारण डीपीआर में दिक्कत आ रही है। इससे फंड भी रुका हुआ है।
अपर मुख्य सचिव एस रामास्वामी की अगुवाई में केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय में जोनल मास्टर प्लान को पेश करने के दौरान इस संबंध में केंद्रीय कमेटी को अवगत कराया गया था। कॉरपोरेशन का कहना है कि जोनल प्लान के पास होते ही डीपीआर बन जाएगी।