मेडिकल के लिए पांच घंटे भटकती रही गैंगरेप पीड़िता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता देखिए। गैंगरेप पीड़िता को मेडिकल जांच के नाम पर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल घुमाया जाता रहा। लापरवाही का आलम यह रहा है कि रुड़की सिविल अस्पताल से पीड़िता के सैंपल की स्लाइड तक खुली भेजी गई। मेडिकल जांच के कागज भी अधूरे भेजे गए।
मेडिकल परीक्षण के लिए पीड़िता को साढ़े पांच घंटे इंतजार करना पड़ा।
महिला अस्पताल में भर्ती उत्तराखंड के रुड़की क्षेत्र की गैंगरेप पीड़िता को परिजन मेडिकल जांच के लिए शुक्रवार सुबह नौ बजे मेला अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन यहां डॉक्टरों ने सीएमएस के आदेश न मिलने तक मेडिकल करने से साफ मना कर दिया।
इसकी भनक भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारियों को लगी तो वह मेला अस्पताल पहुंच गईं। वहां अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। पुलिस और अस्पताल प्रबंधन के समझाने पर भाजपाई शांत हुए और डॉक्टरों ने पीड़िता को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।
अस्पताल से खुली भेज दी सैंपल स्लाइड
यहां डॉक्टरों की जांच में पता चला कि रुड़की सिविल अस्पताल से पीड़िता की स्लाइड सील न करने की बजाय खुली भेजी गई है। इस पर डॉक्टरों ने नाराजगी जताई। कहा कि ऐसे में सैंपल खराब होने की पूरी संभावना रहती है। स्लाइड के साथ छेड़छाड़ की आशंका भी ज्यादा रहती है। रुड़की सिविल अस्पताल से जांच संबंधी कागज भी अधूरे भेजे गए।
डॉक्टरों की नाराजगी पर अधूरे कागजों को सुबह साढ़े दस बजे वापस रुड़की भेजा गया। वहां से कागज सही करके दोपहर ढाई बजे हरिद्वार लाए गए।
बोले डॉक्टर
पीड़िता की रुड़की सिविल अस्पताल से स्लाइड खुली भेजी गई थी। रुड़की से रेफर करते समय अधिकारियों को जांच रिपोर्ट साफ कर देनी चाहिए थी लेकिन कुछ स्पष्ट नहीं था। बाद में पीड़िता के एक्स-रे सहित अन्य जांच करवाई गई।
-डॉ. अनिल कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल हरिद्वार।
जांच से संबंधी जो कागज भेजे गए थे उनमें कुछ कमियां थी। हरिद्वार से आपत्ति लगने के बाद इन कागजों को पूरा करके भेजा गया।
-डॉ. रविंद्र थपलियाल, सीएमएस, सिविल अस्पताल रुड़की।