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Dehradun News: रैंप दे सके न लिफ्ट के लिए जेनरेटर, शिफ्ट कर दिया विभाग
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I- गांधी शताब्दी अस्पताल से महिला विभाग 2022 में कोरोनेशन अस्पताल में शिफ्ट किया गया
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I- अस्पताल की चार फ्लोर की बिल्डिंग खाली पड़ी, 100 बेड भी फांक रहे धूलI
तीन साल तक महिला विभाग चलाने के बाद गांधी शताब्दी अस्पताल प्रशासन को सुध आई कि रैंप न होने से महिलाओं को दिक्कत हो रही है। साथ ही बिजली न रहने पर लिफ्ट भी बंद हो जाती है। इसका उपाय निकाला गया कि न रैंप बनाया जाय न ही लिफ्ट के लिए एक अदद जेनरेटर की व्यवस्था की जाय बल्कि विभाग ही शिफ्ट कर दिया जाय। परिणामस्वरूप गांधी शताब्दी अस्पताल से महिला विभाग कोरोनेशन अस्पताल में 2022 में शिफ्ट कर दिया गया।
महिला विभाग दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने के बाद गांधी शताब्दी अस्पताल की चार फ्लोर की बिल्डिंग और 100 बेड धूल फांक रहे हैं। यहां पर सिर्फ दंत, त्वचा और नेत्र रोग विभाग चल रहा है। महिला विभाग की शिफ्टिंग के बाद अब तक न रैंप बना और न ही जेनरेटर की व्यवस्था की जा सकी। लिफ्ट में अब खराबी आ गई है जिससे वह आए दिन बंद रहती है। बता दें कि गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय का लोकार्पण 2016 में हुआ। 2018 में यहां पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग शुरू किया गया। 2022 में यह विभाग कोरोनेशन अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया।
Iगांधी शताब्दी की बिल्डिंग खाली, कोरोनेशन खचाखचI
गांधी शताब्दी अस्पताल की पूरी बिल्डिंग खाली है लेकिन कोरोनेशन अस्पताल मरीजों से खचाखच रहता है। स्थिति यह है कि कोरोनेशन अस्पताल में शिफ्टिंग के बाद से प्रसव दर भी घट गई है। इस बात का संज्ञान जिलाधिकारी ले चुकी हैं। यहां के स्टाफ के मुताबिक अस्पताल डेडिकेटेड महिला अस्पताल बन सकता था। जिस समय यहां पर स्त्री रोग विभाग चल रहा था उस समय नवजात के इलाज को एनआईसीयू बनाने का काम चल रहा था। यह काम जल्द ही पूरा होने वाला था कि विभाग शिफ्ट कर दिया गया।
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Iरेटिना सर्जन न होने से रेफर हो रहे मरीजI
यहां पर आंखों के लिए ओपीडी चलती है और मोतियाबिंद के ऑपरेशन भी होते हैं। लेकिन, रेटिना सर्जन न होने से यहां पर आंखों के जटिल ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश खेतान ने बताया कि एक सप्ताह में पांच दिन नेत्र रोग विभाग की ओटी होती है। एक दिन में 12 से 15 मरीजों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
Iधूल देखकर स्वास्थ्य सचिव ने लगाई थी फटकारI
अस्पताल में आंखों के डॉक्टर, फिजीशियन, मनोचिकित्सक और स्किन रोग विशेषज्ञ होने से इन विभाग की ओपीडी यहां पर चलती है। इसके बाद भी लगभग पूरा अस्पताल खाली पड़ा हुआ है। इसके अलावा ब्लड बैंक बनाने की कवायद भी चल रही है। पिछले दिनों स्वास्थ्य सचिव ने अस्पताल का निरीक्षण किया था तो अस्पताल में धूल देखकर फटकार लगाई थी।
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Iअस्पताल की बिल्डिंग शिफ्टिंग का निर्णय शासन से लिया गया है। इस संबंध में हम कुछ नहीं कर सकते। अस्पताल के आसपास के लोगों की राय भी यही थी कि अस्पताल की महिला विंग कोरोनेशन में शिफ्ट कर दी जाए। - डॉ. एनएस तोमर, पीएमएस, गांधी शताब्दी अस्पतालI
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I- अस्पताल की चार फ्लोर की बिल्डिंग खाली पड़ी, 100 बेड भी फांक रहे धूलI
तीन साल तक महिला विभाग चलाने के बाद गांधी शताब्दी अस्पताल प्रशासन को सुध आई कि रैंप न होने से महिलाओं को दिक्कत हो रही है। साथ ही बिजली न रहने पर लिफ्ट भी बंद हो जाती है। इसका उपाय निकाला गया कि न रैंप बनाया जाय न ही लिफ्ट के लिए एक अदद जेनरेटर की व्यवस्था की जाय बल्कि विभाग ही शिफ्ट कर दिया जाय। परिणामस्वरूप गांधी शताब्दी अस्पताल से महिला विभाग कोरोनेशन अस्पताल में 2022 में शिफ्ट कर दिया गया।
महिला विभाग दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने के बाद गांधी शताब्दी अस्पताल की चार फ्लोर की बिल्डिंग और 100 बेड धूल फांक रहे हैं। यहां पर सिर्फ दंत, त्वचा और नेत्र रोग विभाग चल रहा है। महिला विभाग की शिफ्टिंग के बाद अब तक न रैंप बना और न ही जेनरेटर की व्यवस्था की जा सकी। लिफ्ट में अब खराबी आ गई है जिससे वह आए दिन बंद रहती है। बता दें कि गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय का लोकार्पण 2016 में हुआ। 2018 में यहां पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग शुरू किया गया। 2022 में यह विभाग कोरोनेशन अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया।
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Iगांधी शताब्दी की बिल्डिंग खाली, कोरोनेशन खचाखचI
गांधी शताब्दी अस्पताल की पूरी बिल्डिंग खाली है लेकिन कोरोनेशन अस्पताल मरीजों से खचाखच रहता है। स्थिति यह है कि कोरोनेशन अस्पताल में शिफ्टिंग के बाद से प्रसव दर भी घट गई है। इस बात का संज्ञान जिलाधिकारी ले चुकी हैं। यहां के स्टाफ के मुताबिक अस्पताल डेडिकेटेड महिला अस्पताल बन सकता था। जिस समय यहां पर स्त्री रोग विभाग चल रहा था उस समय नवजात के इलाज को एनआईसीयू बनाने का काम चल रहा था। यह काम जल्द ही पूरा होने वाला था कि विभाग शिफ्ट कर दिया गया।
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Iरेटिना सर्जन न होने से रेफर हो रहे मरीजI
यहां पर आंखों के लिए ओपीडी चलती है और मोतियाबिंद के ऑपरेशन भी होते हैं। लेकिन, रेटिना सर्जन न होने से यहां पर आंखों के जटिल ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश खेतान ने बताया कि एक सप्ताह में पांच दिन नेत्र रोग विभाग की ओटी होती है। एक दिन में 12 से 15 मरीजों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
Iधूल देखकर स्वास्थ्य सचिव ने लगाई थी फटकारI
अस्पताल में आंखों के डॉक्टर, फिजीशियन, मनोचिकित्सक और स्किन रोग विशेषज्ञ होने से इन विभाग की ओपीडी यहां पर चलती है। इसके बाद भी लगभग पूरा अस्पताल खाली पड़ा हुआ है। इसके अलावा ब्लड बैंक बनाने की कवायद भी चल रही है। पिछले दिनों स्वास्थ्य सचिव ने अस्पताल का निरीक्षण किया था तो अस्पताल में धूल देखकर फटकार लगाई थी।
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Iअस्पताल की बिल्डिंग शिफ्टिंग का निर्णय शासन से लिया गया है। इस संबंध में हम कुछ नहीं कर सकते। अस्पताल के आसपास के लोगों की राय भी यही थी कि अस्पताल की महिला विंग कोरोनेशन में शिफ्ट कर दी जाए। - डॉ. एनएस तोमर, पीएमएस, गांधी शताब्दी अस्पतालI