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शिक्षकों के तबादलों में खूब हुआ खेल
बिशन सिंह बोरा/अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 20 Sep 2013 02:57 PM IST
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शिक्षामंत्री के दावों के उलट प्रदेश में शिक्षकों के तबादलों में जमकर मनमानी हुई है।
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तबादलों में न तो शिक्षकों की उम्र का ख्याल रखा गया न ही पुरानी दुर्गम स्कूलों की सेवाओं का लाभ मिला। 55 की उम्र पार कर चुके कई शिक्षकों को पहाड़ के दुर्गम स्कूलों में भेज दिया गया है। जबकि, नियम के अनुसार ऐसे शिक्षकों को अनिवार्य तबादलों से छूट दी जानी थी।
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इन शिक्षकों को स्कूल तक पहुंचने के लिए रोजाना पहाड़ की टूटी-फूटी पगडंडियों पर तीन से दस किलोमीटर की पैदल परेड करनी पड़ेगी। यही नहीं निर्धारित तिथि के भीतर विकल्प भरने के बावजूद कुछ शिक्षकों के विकल्पों पर विचार भी नहीं किया गया। स्कूलों के वर्गीकरण को लेकर उठे रहे सवालों का भी विभाग के पास कोई जवाब नहीं है। अब अधिकारी कुछ तबादलों को संशोधित कर गड़बड़ियों पर पर्दा डालने की कोशिश में जुटे हैं।
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छूट का दावा बेकार
तबादला नियमावली में 55 साल से अधिक उम्र के शिक्षकों को अनिवार्य तबादलों से बाहर रखा गया है। इसके लिए कट ऑफ डेट 31 मार्च 2013 रखी गई थी। लेकिन शासन ने जुलाई में तबादला प्रक्रिया 30 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी थी। इस बीच जीआईसी डाकपत्थर में गणित के प्रवक्ता भोलानाथ पांडे 55 की उम्र पार गए।
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दुबारा तबादला प्रक्रिया शुरू हुई तो भोलानाथ पांडे को जीआईसी गेरुड (थराली) चमोली भेज दिया गया। यह स्कूल सड़क से दस किलोमीटर की पैदल दूरी पर है। ऐसे और भी शिक्षक हैं जिन्हें कट ऑफ डेट में बदलाव न होने के कारण उम्र के इस पड़ाव में भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी।
नहीं मिला पुरानी सेवाओं का लाभ
जीआईसी दुगड्डा पौड़ी में सहायक अध्यापक समरपाल सिंह राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय न्यूली में छह साल और जीआईसी घुमेटीधार में 15 साल तैनात रह चुके हैं। पहले दुर्गम में रहे इन स्कूलों को अब सुगम श्रेणी में शामिल कर लिया गया है।
इसके बाद समरपाल की पूरी सेवाएं सुगम क्षेत्र में दर्शा दी गई हैं। उनका तबादला अब जीआईसी रडुवा पोखरी चमोली कर दिया गया है। 1990 में जीआईसी चंबा टिहरी में अंग्रेजी सहायक अध्यापिका तदर्थ रहीं विमला डबराल और कई अन्य शिक्षकों के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
विकल्पों पर नहीं किया विचार
तबादले के लिए दस सितंबर तक शिक्षकों से पांच विकल्प मांगे गए थे। जीआईसी रानीपोखरी में अंग्रेजी के प्रवक्ता चंडी प्रसाद त्रिपाठी और गणित के प्रवक्ता अनूप कुमार ने नौ सितंबर को बीईओ कार्यालय डोईवाला में विकल्प जमा करा दिए थे। इसके बावजूद विकल्प पर विचार किए बिना त्रिपाठी का तबादला जीआईसी खनेताखाल रिखडीखाल पौड़ी और अनूप का जीआईसी बूरा चमोली कर दिया गया।
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