Gallantry Awards 2021: पांच आतंकियों को मौत के घाट उतारने वाले शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल को मरणोपरांत शौर्य चक्र
2019 में पुलवामा हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ चले ऑपरेशन में शहीद हुए मेजर विभूति ढौंडियाल ने पांच आतंकवादियों को मार गिराया था।
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पुलवामा में पांच आतंकवादियों को मौत के घाट उतारने वाले शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। सोमवार को दिल्ली में आयोजित अलंकरण समारोह में उनकी पत्नी लेफ्टिनेंट नितिका कौल और मां ने राष्ट्रपति से पुरस्कार ग्रहण किया।
2019 में हुए सैन्य अभियान में शहीद हुए थे ढौंडियाल
दून निवासी विभूति ढौंडियाल जम्मू-कश्मीर में हुए 2019 में हुए सैन्य अभियान में शहीद हो गए थे। पुलवामा हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ चले ऑपरेशन में शहीद हुए मेजर विभूति ढौंडियाल ने पांच आतंकवादियों को मार गिराया था।
#WATCH | Delhi: Major Vibhuti Shankar Dhoundiyal’s wife Lieutenant Nitika Kaul and mother Saroj Dhoundiyal receive his Shaurya Chakra (Posthumous) for an operation in Jammu and Kashmir in which five terrorists were killed and 200 kg explosives were recovered. pic.twitter.com/0TmNwgBQ3b
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) November 22, 2021
वर्तमान में उनके घर में मां सरोज, पत्नी नितिका और सबसे छोटी बहन वैष्णवी हैं। सबसे बड़ी बहन पूजा की शादी हो चुकी है। उनके पति विकास नौटियाल सेना में कर्नल हैं। उनसे छोटी बहन प्रियंका शादी के बाद अमेरिका में रहती हैं। शहीद मेजर विभूति को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था।
पति के नक्शेकदम पर चलते हुए नितिका कौल ने पहनी सेना की वर्दी
पति शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल के नक्शेकदम पर चलते हुए नितिका कौल ने सेना की वर्दी पहनी है। मेजर विभूति के शहीद होने के बाद पत्नी निकिता ने पति के सपने को पूरा करने के लिए सेना में जाने का निश्चय किया।
निकिता ने दिसंबर 2019 में इलाहाबाद में वूमेन एंट्री स्कीम की परीक्षा दी थी। इसके बाद चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) से निकिता को कॉल लेटर आया और ट्रेनिंग पूरी कर निकिता ओटीए की पासिंग आउट परेड में बतौर लेफ्टिनेंट आधिकारिक रूप से सेना में शामिल हो गईं।
मेजर विभूति की शादी 18 अप्रैल 2018 को हुई थी। 19 अप्रैल को पहली बार पत्नी निकिता को लेकर वह डंगवाल मार्ग स्थित अपने घर पहुंचे थे। इसके ठीक दस माह बाद मेजर विभूति शहीद हो गए थे।