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ग्रीम कालीन राजधानी गैरसैंण तो सत्र देहरादून में क्यों
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ग्रीष्म कालीन राजधानी गैरसैंण घोषित होने के बावजूद ग्रीष्मकालीन सत्र देहरादून में आयोजित करने के सरकार के फैसले पर राजधानी गैरसैंण निर्माण अभियान समिति ने सवाल उठाए हैं। समिति का कहना है कि यात्रा हर साल होनी है, ऐसे में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित क्यों किया गया।
रघुवीर सिंह बिष्ट, लक्ष्मी प्रसाद थपलियाल व प्रदीप कुकरेती ने कहा कि सरकार चारधाम यात्रा का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है। ऐसा कर सरकार राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों के संघर्ष का मखौल उड़ाने का कार्य कर रही है। मनोज ध्यानी व पीसी थपलियाल ने कहा कि सच्चाई यह है कि वहां अभी तक समुचित व्यवस्थाएं ही नहीं है।
कहा कि सरकार को सर्वप्रथम गैरसैंण को जिला घोषित करना चाहिए। इसके बाद वहां सभी सुविधाएं जुटानी चाहिए, ताकि सत्र आयोजित करने में कोई परेशानी न हो। कहा कि कर्मचारियों की भर्ती कर व्यवस्थाएं दुरुस्त करे। इस मौके पर दिवाकर चमोली, राकेश छाबड़ा, अनिल रावत, पुष्कर नेगी, एसएस पंवार, अमित सिंह परमार, रविंद्र प्रधान आदि मौजूद रहे।
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रघुवीर सिंह बिष्ट, लक्ष्मी प्रसाद थपलियाल व प्रदीप कुकरेती ने कहा कि सरकार चारधाम यात्रा का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है। ऐसा कर सरकार राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों के संघर्ष का मखौल उड़ाने का कार्य कर रही है। मनोज ध्यानी व पीसी थपलियाल ने कहा कि सच्चाई यह है कि वहां अभी तक समुचित व्यवस्थाएं ही नहीं है।
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कहा कि सरकार को सर्वप्रथम गैरसैंण को जिला घोषित करना चाहिए। इसके बाद वहां सभी सुविधाएं जुटानी चाहिए, ताकि सत्र आयोजित करने में कोई परेशानी न हो। कहा कि कर्मचारियों की भर्ती कर व्यवस्थाएं दुरुस्त करे। इस मौके पर दिवाकर चमोली, राकेश छाबड़ा, अनिल रावत, पुष्कर नेगी, एसएस पंवार, अमित सिंह परमार, रविंद्र प्रधान आदि मौजूद रहे।
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