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पीपीपी मोड या लीज पर दी जाएगी गदरपुर और सितारगंज चीनी मिल, कई सालों से पड़ी हैं बंद
Thu, 28 Nov 2019 09:40 AM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 28 Nov 2019 09:40 AM IST
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
उत्तराखंड में पिछले कई सालों से बंद पड़ी सहकारी क्षेत्र की गदरपुर व सितारगंज चीनी मिल को सरकार पीपीपी मोड (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) या लीज पर देकर दोबारा से संचालित करने की तैयारी में है।
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बुधवार को कैबिनेट ने इसकी सैद्धांतिक सहमति देते हुए विभाग को दोनों विकल्पों के मद्देनजर प्रस्ताव बनाने को कहा है। वहीं, कैबिनेट ने सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र की चार चीनी मिलों को 400 करोड़ की शासकीय गारंटी राशि में छूट देने की मंजूरी दे दी है।
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घाटे में चलने के कारण सरकार ने वर्ष 2015 में गदरपुर और 2017 में सितारगंज चीनी मिल को बंद करने का निर्णय लिया था। दोनों चीनी मिलों पर करीब 110 करोड़ की देनदारी है। वर्तमान में दोनों मिलों में चीनी का उत्पादन नहीं हो रहा है, इन मिलों को दोबारा से संचालित करने के लिए विभाग ने पीपीपी मोड या लीज पर देने का प्रस्ताव कैबिनेट में रखा था।
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इस पर सैद्धांतिक सहमति देते हुए कैबिनेट ने दोनों विकल्पों का परीक्षण कर दोबारा प्रस्ताव बनाने को कहा है। वहीं, खराब आर्थिक स्थिति के चलते चीनी मिल ऋण राशि पर एक प्रतिशत नकद साख सीमा (कैश क्रेडिट लिमिट) शुल्क देने की स्थिति में नहीं है।
जिससे कैबिनेट ने डोईवाला, किच्छा, बाजपुर व नादेही चीनी मिल को करीब 400 करोड़ की शासकीय गारंटी शुल्क में छूट दे दी है। पेराई सत्र 2018-19 के लिए चीनी मिलों को गारंटी शुल्क राजकोष में जमा नहीं करना होगा।