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बदरीनाथ मंदिर के लिए गाडू घड़ी कलश रवाना
ब्यूरो / अमर उजाला, नरेंद्रनगर (टिहरी)
Updated Fri, 10 Apr 2015 01:19 PM IST
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बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने के बाद छह माह तक भगवान बदरी विशाल को चढ़ाया जाने वाला तिलों का तेल महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह की मौजूदगी में शहर की सुहागिनों ने निकाला।
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देर शाम को गाडू घड़ी (तेल का कलश) की विधिवत पूजा-अर्चना कर राजमहल से ऋषिकेश के लिए रवाना किया गया। गाडू घड़ी को 26 अप्रैल को सुबह 5.15 बजे बदरीनाथ के कपाट खुलने के मौके पर गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।
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नरेंद्रनगर में राज पुरोहित संपूर्णानंद जोशी, पंडित हेतराम थपलियाल, महावीर प्रसाद और कृष्ण प्रसाद उनियाल ने गुरुवार को सुबह 10 बजे राजमहल में स्थित मां राज राजेश्वरी और लक्ष्मी नारायण के मंदिर में पूजा-अर्चना कर महाराजा मनुजयेंद्र शाह और महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह ने हाथों से तिलों के तेल निकालने की परंपरा को आगे बढ़ाया।
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इसके बाद शहर की सुहागिनों ने पीले कपड़े पहनकर तिलों को भूना और ओखली में और शिलबट्टे पर पिसकर तेल निकाला। देर शाम को महाराजा ने गाडू घड़ी की पूजा कर उसे ऋषिकेश के लिए रवाना किया। परंपरा के अनुसार बदरीनाथ के कपाट खुलने के दौरान छह माह तक भगवान बदरी विशाल को इस तेल का लेपन किया जाता है।
यही तेल पूजा के उपयोग में लाया जाता है। इस मौके पर डिम्मर धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष सुरेश चंद्र डिमरी, मंत्री उमेश चंद्र डिमरी, शिव प्रसाद डिमरी, गिरीश चंद्र, राजपाल जड़धारी, डा. प्रमोद उनियाल, उपेंद्र दत्त थपलियाल आदि मौजूद थे।
गाडू घड़ी 25 को पहुंचेगी बदरीनाथ
गाडू घड़ी कलश यात्रा बृहस्पतिवार को ऋषिकेश में विश्राम के लिए रुकी। 10 अप्रैल को दिन में 11 बजे ऋषिकेश से प्रस्थान कर छह बजे शाम को श्रीनगर पहुंचकर रात्रि विश्राम करेगी। 11 अप्रैल को श्रीनगर से प्रस्थान कर रुद्रप्रयाग होते हुए छह बजे शाम कर्णप्रयाग स्थित उमा देवी मंदिर पहुंचेगी। 12 अप्रैल को दोपहर 12 बजे डिम्मर गांव के लिए चलेगी।
जहां पर 10 दिन रुकने के बाद 23 अप्रैल को जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर पहुंचेगी। 24 को शीतकालीन पूजा स्थल पांडुकेश्वर पहुंचेगी। 25 अप्रैल को उद्धव और कुबेर की डोली के साथ बदरीनाथ धाम पहुंचेगी। 26 अप्रैल को सुबह 5.15 मिनट पर बदरीनाथ के कपाट उद्घाटन के मौके पर गर्भगृह में स्थापित की जाएगी।