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‘राजा’ की सुरक्षा के लिए अब खुलेगा खजाना
अमर उजाला, हल्द्वानी (नैनीताल)
Updated Mon, 05 May 2014 12:43 AM IST
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गौला कापर्स से सुरक्षा प्रबंधों पर खर्च होने वाला बजट अब अफसरों की मनमर्जी पर नहीं बंटेगा। वहां पर बजट ज्यादा मिलेगा, जहां पर बाघ समेत दूसरे वन्यजीवों की संख्या ज्यादा होगी। इसके लिए पश्चिम वृत्त ने पांच ‘इंडीकेटर’ तैयार किए गए हैं।
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यहां पर भी हैं बाघ
कार्बेट पार्क के अलावा रामनगर, तराई पश्चिम, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, हल्द्वानी और नैनीताल वन प्रभाग बाघ समेत दूसरे वन्यजीवों की अच्छी-खासी संख्या है, लेकिन कार्बेट की तरह इन प्रभागों में सुरक्षा के लिए स्पेशल बजट नहीं मिलता है।
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केंद्रीय वन मंत्रालय के निर्देश पर गौला कापर्स का गठन किया गया। इसमें खनन से मिलने वाला राजस्व जमा होता है पर अब तक इस कापर्स से अफसरों की मनमर्जी पर बजट आवंटित होता था।
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इस बार बदले हैं नियम
इस बार नियमों में बदलाव किया गया है। वन संरक्षक पश्चिम वृत्त के निर्देश पर बजट देने के लिए बायो डायवर्सिटी इंडीकेटर तैयार किया गया है।
इसके आधार पर बजट मिलेगा। मसलन, जिस रेंज में बाघों की संख्या ज्यादा होगी वहां पर ज्यादा बजट मिलेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
तराई पूर्वी वन प्रभाग डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि बजट देने से पहले बाघ समेत दूसरे वन्यजीवों की संख्या, वास स्थल की स्थिति, मानव वन्यजीव संघर्ष, वन्यजीवों की मृत्यु/शिकार आदि के आधार पर बजट मिलेगा, जहां पर जंगल कम है या फिर वन्यजीवों की संख्या कम है उस रेंज को बजट कम मिलेगा।