रेत-बजरी की ‘मलाई’ मिल बांटकर खाई
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राजधानी देहरादून के रिस्पना नदी में हो रहे अवैध खनन की मलाई सारे जिम्मेदार विभाग मिल-बांटकर खा रहे हैं। नदी से हर रोज औसतन 50 ट्रक रेत-बजरी निकाली जा रही है।
एक ट्रक में दो से तीन ट्रैक्टर ट्राली के बराबर उपखनिज रहता है। हर ट्राली 2500 रुपये में बेची जाती है। इस तरह हर रोज ठेकेदार करीब दो लाख रुपये के वारे-न्यारे कर रहा है। लेकिन, नदी से निकासी के दौरान इन वाहनों को कभी चेक नहीं किया जाता।
इन दिनों रिस्पना नदी में दौड़वाला पुल से एमडीडीए डिफेंस कालोनी पुल के बीच इस वक्त मलबा हटाने के नाम पर खनन चल रहा है। यहां से रेत-बजरी से लदे जो ट्रक निकलते हैं, उन्हें शहर के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जा रहा है।
वाहनों का रवन्ना काटा जाता है
एक ट्रक ड्राइवर ने बताया कि वह रेत-बजरी माजरा क्षेत्र में ले जाता है। इसका भंडारण कहां किया जा रहा है? इस पर खामोश हो गया। इसके अलावा प्रेमनगर और दूसरे क्षेत्रों में रिस्पना से रेत-बजरी भेजी जा रही है।
दूसरी ओर, एमडीडीए डिफेंस कालोनी के पास रेत-बजरी के खरीदार ट्रैक्टर ट्रालियां लिए खड़े रहते हैं। ट्रक यहां पहुंचते हैं और रेत-बजरी ट्रालियों में डाल रकम वसूल ली जाती है।
खास बात यह है कि पुलिस की टोकाटाकी से बचने के लिए खनन सामग्री लेकर निकलने वाले वाहनों का रवन्ना काटा जाता है, लेकिन यह तय नहीं होता कि किस ट्रक में कितनी रेत-बजरी लादी गई है।
इसके अलावा मौके पर निरीक्षण के लिए खनन विभाग और जिला प्रशासन का कोई नुमाइंदा मौजूद नहीं रहता। खनिज, यूजेवीएनएल और सिंचाई विभाग के जो कर्मचारी यहां तैनात हैं भी वे खनन की कोई रिपोर्ट प्रशासन को नहीं देते। दोपहर में सभी कर्मचारी लंच पर चले जाते हैं, तब भी यहां से ट्रक रेत-बजरी लेकर निकलते रहते हैं।
ऐसे होनी चाहिए नदी की सफाई
(आपदा प्रबंधन अधिनियम)
-नदी में पड़ा कचरा बाहर निकाला जाए
-नदी से मलबा हटाया जाना है
-अधिकतम एक मीटर गहराई से सिल्ट उठाई जा सकती है
हो यह रहा है
-नदी में कचरा उसी तरह पड़ा है
-मलबा जहां है वहीं पड़ा है
-बीच में डेढ़-दो मीटर गहरे गड्ढे करके रेत-बजरी निकाली जा रही है