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डिग्री से मरीजों को झांसा दे रहे डाक्टर

Mon, 05 Aug 2013 10:05 AM IST
रजा शास्त्री
रजा शास्त्री Updated Mon, 05 Aug 2013 10:05 AM IST
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fraud doctors

राजधानी के कुछ डाक्टर अपने नाम के आगे सुपर स्पेशलिस्ट की डिग्री का उल्लेख कर रहे हैं, जबकि यह डिग्री उनके पास है नहीं। यह हरकत एक तरह से मरीजों के साथ ठगी है।

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मरीज डाक्टर की डिग्री से प्रभावित होकर इलाज करवाता है, जबकि डाक्टर उस स्तर का इलाज नहीं कर पाता। महानिदेशक चिकित्सा एवं परिवार कल्याण डा. योगेशचंद्र शर्मा का कहना है कि ऐसे डाक्टरों को चिह्नित करके उनकी डिग्री की जांच कराई जाएगी।
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झोलाछाप डाक्टर तो बड़े पैमाने पर अपने बोर्ड पर फिजिशियन एंड सर्जन, बालरोग विशेषज्ञ समेत तरह-तरह की डिग्रियां लिखे रहते हैं। लेकिन अब सरकारी और पीपीपी मोड पर चल रहे अस्पतालों के डाक्टर भी अपने नाम के आगे फर्जी डिग्री लिखने लगे हैं। कई सरकारी डाक्टरों ने एमडी करने के बाद अपोलो और दूसरे अस्पतालों से फेलोशिप करके हृदय रोग और गुर्दा रोग विशेषज्ञ लिखना शुरू कर दिया है।
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दून अस्पताल के कुछ फिजिशियन ने अपने नाम के आगे हृदय रोग विशेषज्ञ और गुर्दा रोग विशेषज्ञ का बोर्ड लगा रखा है। डाक्टरों का नाम अस्पताल के फिजिशियन की सूची में भी है। इस वजह से मरीज इन्हें स्पेशलिस्ट के बजाए सुपर स्पेशलिस्ट समझता है। पीपीपी मोड पर चल रहे अस्पतालों में सामान्य फिजिशियन अपने को सुपर स्पेशलिस्ट बताया करते हैं। अपनी दिलचस्पी के अनुसार इन लोगों ने सुपर स्पेशलिस्ट की डिग्री लिख रखी है।

मैं अपने अस्पताल में इस तरह की हरकत नहीं होने दूंगा। किसी को फर्जी सुपर स्पेशलिस्ट की डिग्री लगानी है तो अपने घर पर जाकर लगाए। इसे दिखवाता हूं।
- डा. आरएस असवाल, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक दून अस्पताल

ऐसे डाक्टरों की डिग्री की जांच होने के बाद सही पता लगेगा। डाक्टर के पास एसआरशिप है कि डिप कार्ड है या कुछ नहीं है। फेलोशिप भी तरह-तरह की होती रहती हैं।
- डा. एनएच जंगपांगी, निदेशक चिकित्सक शिक्षा

मरीजों को नुकसान
गुर्दा रोग, हृदय रोग, मधुमेह आदि रोगों में सामान्य फिजिशियन और सुपर स्पेशलिस्ट की डायग्नोसिस तैयार करने का तरीका अलग होता है। फिजिशियन सामान्य तरह से रवायती दवाएं लिखेगा, जबकि सुपर स्पेशलिस्ट तमाम तरह की बारीकियों पर भी मनन करता है। इससे मरीज की डायग्नोसिस तैयार करने में जमीन-आसमान का फर्क आ जाता है। डायग्नोसिस में जरा सी चूक से रोगी की हालत बिगड़ जाएगी और जान भी जा सकती है।

यह डिग्रियां होती हैं सुपर स्पेशलिस्ट की

गुर्दा रोग, हृदय रोग और मधुमेह में सुपर स्पेशलिस्ट की डिग्री को डीएम कहते हैं। इन विशेषज्ञता में डीएनबी की भी डिग्री दी जाती है। ये डिग्रियां मेडिसिन में एमडी करने के बाद मिलती हैं यानी एमडी करने के बाद इन सुपर स्पेशलिटी की डिग्री के लिए फिजिशियन को अलग से पढ़ाई करनी पड़ती है।


गुर्दा रोग विशेषज्ञ लिखने के लिए नेफ्रोलोजी में डीएम और हृदय रोग विशेषज्ञ लिखने के लिए कार्डियोलोजी में डीएम होना जरूरी है। बहुत से डाक्टर एमडी के बाद इन सुपर स्पेशलिटी में डिप्लोमा लेकर सुपर स्पेशलिस्ट लिखने लगते हैं।

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