कार्बेट पार्क के नाम पर पर्यटकों को 'जंगल' में घुमाया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) के नाम पर पर्यटकों से फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। टूर ऑपरेटरों ने सीटीआर की वेबसाइट की हूबहू फर्जी वेबसाइट बना ली है।
इसके जरिए वे देश-विदेश के पर्यटकों की अवैध रूप से बुकिंग कर रहे हैं। पर्यटकों की शिकायत पर सीटीआर प्रशासन ने जांच कराई तो 25 वेबसाइटें चिन्हित की गईं। सभी को नोटिस जारी कर दिया गया है।
बीते दिनों वेबसाइट के जरिए बुकिंग कराकर कई पर्यटक सीटीआर मुख्य गेट पर पहुंचे। कर्मचारियों ने देखा तो उनकी बुकिंग फर्जी निकली। पर्यटकों ने कहा कि उन्होंने ऑनलाइन बुकिंग कराई है।
इस बीच, पर्यटकों और कर्मचारियों की नोकझोंक भी हुई। उन्होंने सीटीआर प्रशासन से शिकायत की। इस पर सीटीआर प्रशासन ने गहन जांच पड़ताल की तो अफसर भी हैरान रह गए।
टूर ऑपरेटरों ने कार्बेट पार्क की वेबसाइट से मिलती-जुलती अपनी वेबसाइट बना रखी है जिसमें कार्बेट पार्क को अपनी संपत्ति बताकर बुकिंग की जा रही है।
कार्बेट के नाम पर घुमाते थे सीतावनी
देश-विदेश के पर्यटक इन साइटों के जरिए बुकिंग कराते हैं। यहां आकर पर्यटक ठगा महसूस करते हैं। गौरतलब यह है कि वेबसाइट में पार्क की जानकारियों के साथ ढिकाला के पुराने वन विश्राम गृह की फोटो भी अपलोड की गई है।
पार्क के निदेशक समीर सिन्हा ने बताया कि ऐसी 25 वेबसाइटें चिन्हित की गई हैं, उन्हें आईटी एक्ट के तहत नोटिस भेजे गए हैं।
टूर ऑपरेटर और टैक्सी चालकों की पर्यटकों के साथ धोखाधड़ी पूर्व में कई बार पकड़ी जा चुकी है। वे कार्बेट पार्क के नाम पर पर्यटकों को सीतावनी का भ्रमण करा देते थे। कई बार मामला कोतवाली तक पहुंचा।
इस पर सीटीआर प्रशासन को सीतावनी में जगह-जगह बोर्ड लगाने पड़े, जिनमें लिखा था ‘ये कार्बेट पार्क नहीं है’। फिलहाल यहां अब कार्बेट लैंडस्केप के बोर्ड लगाए गए हैं।