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देहरादून में हैं 'स्पेशल 26' जैसे कई ठग
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 13 Apr 2015 03:51 PM IST
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आईएएस बनकर फर्जीवाड़ा करने वाली रूबी चौधरी अकेली नहीं है। उससे पहले भी कई लोग खुद को आईएएस बताकर देहरादून में ठगी का धंधा चला चुके हैं और जेल भी गए हैं।
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इनमें से कुछ मामले खुले तो कुछ पर पुलिस ने खुद ही फजीहत के डर से मिट्टी डाल दी। इतना जरूर है कि छह माह तक रूबी चौधरी के एलबीएस अकादमी में रहने का मामला अपनी तरह का पहला है।
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पुलिस सूत्र बताते हैं कि राजधानी में इस तरह के फर्जीवाड़े के मामले अधिक होते हैं। इसकी वजह यह है कि यहां पुलिस से लेकर निचले स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों पर शासन का दबाव रहता है। ऐसे में किसी के भी खुद को आईएएस बताते ही पुलिस विवाद के डर से बैकफुट पर आ जाती है। पुलिस की इसी स्थिति का फायदा ठगी करने वाले उठाते हैं।
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पूर्व डीजीपी जेएस पांडे कहते हैं कि जब तक पूरी जांच न हो जाए और आईएएस बताने वाले के फर्जी होने की पुष्टि न हो जाए, तब तक पुलिस ऐसे लोगों पर हाथ डालने से कतराती है। हालांकि, वह कहते हैं कि रूबी चौधरी का मामला अलग है। यह आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा मसला है। लेकिन अन्य मामलों में जिस तरह लोगों ने फर्र्जी आईएएस बनकर ठगी की है, वह चिंताजनक है।
मामला एक
वर्ष 2010 में चकराता रोड स्थित कार शोरूम रोहन मोटर्स में एक युवती पहुंची। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी की यूनिफार्म पहने इस युवती ने अपना परिचय प्रशिक्षु आईएएस के तौर पर दिया। शोरूम संचालक से उसने स्विफ्ट वीएक्सआई खरीदने की बात कही।
युवती ने बतौर आईडी आईएएस अकादमी का पहचान पत्र भी दिया। आईकार्ड और वर्दी देख शोरूम संचालक और कर्मचारी दबाव में आ गए। युवती को उसकी पसंद के रंग वाली कार दी गई। भुगतान में युवती ने लाखों के चेक शोरूम संचालक को दिए। चेक बाउंस हुए तो कैंट थाने में मुकदमा दर्र्ज कराया गया। जांच में पता चला कि अकादमी र्की आईडी फर्जी थी। युवती को जेल जाना पड़ा था।
मामला दो
वर्ष 2011 में दून के एक मेडिकल कॉलेज की जांच सीबीआई और एमर्सीआई कर रही थी। एमबीबीएस की सीटों पर धांधली की शिकायत पर देशभर के संस्थानों में यह जांच चल रही थी। इसी बीच एक व्यक्ति मेडिकल कॉलेज पहुंचा और प्रबंधन के पास खुद को आईएएस अफसर बताते हुए पदनाम संयुक्त सचिव सीर्बीआई बताया और कॉलेज को जांच से बचाने की डील कर ली।
लाखों रुपए उसके खाते में जमा करा दिए गए। इसके बाद वह एक दिन सीमाद्वार स्थित सीबीआई कार्यालय पहुंचा। उसका परिचय सुनते ही अधिकारियों ने सैल्यूट मार स्वागत किया। कथित संयुक्त सचिव ने मेडिकल कालेज की फाइल मंगाई और इसके पन्ने पलटने के बाद कहा, जांच पूरी हो गई।
उसके निकलने के बाद एसपी को शक हुआ और संयुक्त सचिव के बताए वर्ष के बैच की जानकारी खंगाली तो सच सामने आ गया। मुकदमा दर्ज हुआ और आरोपी डोईवाला से पकड़ लिया गया।
मामला तीन
वर्ष 2009 में राजपुर रोड स्थित एक बार में चार युवक और दो युवती पहुंचे। बार मैनेजर को पास बुलाया और खुद को दिल्ली के आईएएस अधिकारी बताया। कहा कि सभी आईएएस अकादमी में विशेष प्रशिक्षण के लिए आए हैं।
उनकी डिस्काउंट की मांग मैनेजर ने मान ली। रात को सब जाने लगे तो बिल सौंपते ही उखड़ गए। रौब गालिब करते हुए कहा कि अगर डीएम, एसएसपी को बुला दिया तो तुम्हें फंसा देंगे। बवाल हुआ तो पुलिस पहुंची और फर्जी आईएएस का भेद खुल गया। इनका शांति भंग में चालान किया गया।