इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्टस फेस्टिवल: चार विभूतियों को मिला ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ अवार्ड
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इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्टस फेस्टिवल ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ का रविवार को समापन हो गया। फेस्टिवल के अंतिम विदाई सत्र में चार विभूतियों को ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ अवार्ड से नवाजा गया। इनमें मशहूर शायर मुनव्वर राणा, संतोष चौबे, नितिन साठे और नमिता गोखले शामिल हैं।
इन लेखकों को वर्ष 2016 में लिखी पुस्तकों के लिए यह अवार्ड दिया गया। अवार्ड के साथ प्रशस्ति पत्र और एक लाख रुपये की धनराशि प्रदान की गई। इस फेस्टिवल का अमर उजाला मीडिया पार्टनर रहा है।
दि शिवालिक हिल्स फाउंडेशन ट्रस्ट के बैनर तले ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ का आयोजन राजपुर रोड स्थित मधुबन होटल में किया गया। शायर मुनव्वर राणा को उनकी आत्मकथा ‘मीर आकर लौट गया’, नमित गोखले को घटोत्कच पर लिखी उनकी पुस्तक ‘थिंग्स टु लीव बिहाइंड’, नितिन साठे को एक पायलट के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘बोर्न टु फ्लाई’ और संतोष चौबे को संगीत और शोर के द्वंद पर लिखी पुस्तक ‘जलतरंग’ के लिए सम्मानित किया गया।
इस मौके पर लेखकों ने अपनी पुस्तकों की विषय वस्तु के संबंध में संक्षिप्त में विचार व्यक्त किए। ओएनजीसी के कार्यकारी निदेशक आशुतोष भारद्वाज, पूर्व सांसद तरुण विजय, सेवानिवृत्त आईएएस रोबिन गुप्ता ने लेखकों को अवार्ड प्रदान किए।
कार्यक्रम का संचालन फेस्टिवल के ऑनरेरी एडवाइजर संजीव चोपड़ा और लेखक ओम निश्चल ने किया। इस मौके पर पूर्व सांसद तरुण विजय ने कहा कि फेस्टिवल में पहली बार सैन्य कथाओं को प्रभावी रूप से साहित्य में शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति यही है कि हम एक-दूसरे के विचारों से असहमत होते हुए भी एक साथ बैठते हैं। इस दौरान मुनव्वर राणा की गजलों ने महफिल में समा बांध दिया। इस दौरान अगले साल मिलने का वादा किया गया। अंत में लेखक डॉ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।