उत्तराखंड: सरकारी अस्पताल में आए डिलीवरी के चार केस, दुनिया में आने के बाद चारों नवजात की मौत
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कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल में 36 घंटे के भीतर चार नवजात शिशुओं की मौत का सनसनीखेज मामला सामने आया है। 13 अगस्त की रात से 15 अगस्त की शाम तक चार नवजातों की मौत से अस्पताल में हड़कंप मच गया। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही और नियोनेटल केयर यूनिट (एनआईसीयू) न मिलने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों से इनकार किया है।
बग्घा चौवन खटीमा निवासी संजय की भाभी प्रभावती को खटीमा के सरकारी अस्पताल से रेफर कर 13 अगस्त की रात लगभग 11 बजे सुशीला तिवारी अस्पताल भेजा गया था। संजय का आरोप है कि रात दो बजे तक किसी डॉक्टर ने हाथ नहीं लगाया। ढाई बजे डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया। बच्चा थोड़ा-थोड़ा रो रहा था और उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। 14 अगस्त तड़के उसे एनआईसीयू में ले गए और 15 अगस्त की शाम साढ़े चार बजे बच्चे ने दम तोड़ दिया।
इसी तरह कोटाबाग निवासी महेश कांडपाल अपनी पत्नी रीता कांडपाल को लेकर बुधवार दोपहर 12 बजे अस्पताल पहुंचे थे। महेश के अनुसार, डॉक्टर ने नॉर्मल डिलीवरी की बात कही थी। पत्नी दर्द से तड़पती रही जबकि डॉक्टर अंदर सो रही थी। रात तीन बजे डॉक्टर बाहर आई और डिलीवरी के कुछ ही देर बाद बच्चे की मौत हो गई। आरोप है कि बच्चे को एनआईसीयू में नहीं रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रसव से पहले किसी कागज पर हस्ताक्षर नहीं कराए और बच्चे की मौत के बाद सुबह से कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया।
बच्चा दो घंटे तक जीवित रहा और फिर उसकी मृत्यु हो गई
तीसरी घटना हल्दूचौड़ निवासी भुवन सिंह के साथ घटी। वह अपनी पत्नी खष्टी नेगी को लेकर बुधवार रात 12 बजे एसटीएच पहुंचे थे। डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद नार्मल डिलीवरी की बात कही थी। सुबह साढ़े चार बजे प्रसव होने के बाद बच्चा दो घंटे तक जीवित रहा और फिर उसकी मृत्यु हो गई। भुवन का आरोप है कि बच्चे के गले में जन्म के दौरान गंदा पानी चला गया था जिससे उसकी मौत हो गई। बताया कि बच्चे का वजन ढाई किलो था, जबकि डॉक्टर बच्चे को कमजोर बता रहे हैं। ओखलकांडा निवासी गुड्डी भी स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग पहुंची और किसी ने उसे हाथ तक नहीं लगाया। उसका बच्चा भी मृत पैदा हुआ।
बच्चे कमजोर और अस्वस्थ थे। दो बच्चों की मौत तो मां के पेट में ही हो गई थी। किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई है फिर भी मामले की जांच कराई जाएगी।
-डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
चार नवजात की मौत का मामला संज्ञान में आया है। किसी भी स्तर पर लापरवाही का मामला नहीं है। इस मामले में प्राचार्य से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
-डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा-शिक्षा
मैं अस्पताल गया था। पूछताछ में अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि नवजात की मौत का कारण प्रसव के दौरान उनका संपूर्ण विकास न होना था। इस मामले में अभी तक किसी भी अभिभावक की ओर से शिकायत नहीं मिली है। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही जैसी कोई शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी।
-पंकज उपाध्याय, सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी