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गर्भवती के इलाज में लापरवाही बरतने पर लगाया फोरम ने जुर्माना

Fri, 18 Oct 2019 12:06 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 18 Oct 2019 12:06 AM IST
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Forum imposed penalty for negligence in the treatment of pregnant
जिला उपभोक्ता फोरम ने चिकित्सीय सेवा में लापरवाही मानते हुए प्रीत मेटरनिटी होम, आर्यनगर ज्वालापुर पर जुर्माना लगाया है। उसने उसे शिकायतकर्ता को वाद योजित करने की तिथि से लेकर अब तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से चार लाख, 90 हजार अदा करने के आदेश दिए हैं।
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तनवीर पुत्र इकबाल, निवासी मोहल्ला कस्साबान, ज्वालापुर ने डॉ. मनप्रीत कौर निवासी प्रीत मेटरनिटी होम ज्वालापुर और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड हरिद्वार के प्रबंधक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। बताया था कि उसकी पत्नी प्रथम बार जब गर्भवती हुई तो उसका इलाज मेटरनिटी अस्पताल में 22 नवंबर, 2014 से लगातार चल रहा था। यहां प्रसव की तारीख 23 जून, 2015 बताई गई। 22 मई, 2015 को उसकी पत्नी के पेट में दर्द की शिकायत हुई तो वह तुरंत अस्पताल ले गए, जहां पर उन्होंने पत्नी को सुबह से शाम तक भर्ती रखा। इसके बाद उन्हें अगले दिन आने के लिए कहा गया।
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23 मई, 2015 को जब तनवीर अपनी पत्नी को मेटरनिटी होम लेकर गए तो उन्हे कुछ टेस्ट कराने की सलाह दी गई। उन्होंने टेस्ट कराने के बाद रिपोर्ट दिखाई। इसके बाद 25 मई, 2015 को दिक्कत बढ़ने पर विपक्षी ने 26 मई, 2015 को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी और रिपोर्ट देखकर कहा कि कोई परेशानी नहीं है। 16 जून, 2015 को उनकी पत्नी को फिर चेकअप के लिए बुुलाया गया। 30 मई, 2015 को पत्नी के पेट में दर्द की शिकायत पर डॉक्टर ने फिर सब ठीक बताया। शिकायतकर्ता 30 मई, 2015 को दिन में करीब 12.30 बजे पत्नी को प्रेम नर्सिंग होम लेकर पहुंचा।
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वहां डॉक्टर संध्या शर्मा ने वादी की पत्नी को चेक करके बताया कि गर्भ में बच्चे की धड़कन नहीं आ रही है। अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी टेस्ट कराए गए तो उसमें बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो जाने की पुष्टि हुई। डॉक्टर संध्या शर्मा ने बताया कि तुरंत ऑपरेशन से बच्चे को निकालना पड़ेगा नहीं तो गर्भवती की जान जा सकती है। बेहाल वादी यह रिपोर्ट लेकर विपक्षी प्रीत नर्सिंग होम गया, वहां पर डॉक्टर ने शिकायतकर्ता की बात सुनने के बजाय उल्टा रिपोर्ट को फर्जी बता दिया और प्रार्थी के साथ लड़ाई झगड़ा करने लगे। पुलिस भी बुला ली गई। शिकायतकर्ता की पत्नी की तबीयत लगातार खराब हो रही थी, जिस कारण उसके रिश्तेदार शिकायतकर्ता की पत्नी को सीएमआई अस्पताल देहरादून ले गए, जहां बच्चे को मृत अवस्था में गर्भ से निकाला। बच्चे के गर्भ में मौत हो जाने के कारण उसकी पत्नी का पेट फूल गया था। गंभीर स्थिति में पत्नी का आईसीयू में रखा गया। उसके इलाज में करीब 75 हजार रुपए का खर्च आया। शिकायतकर्ता ने इलाज में खर्च हुई धनराशि की विपक्षी प्रीत मेटरनिटी अस्पताल से मांग की तो उन्होंने कोई सुनवाई नहीं की। परेशान होकर शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम की शरण ली। फोरम के अध्यक्ष कंवर सेन, सदस्य अंजना चड्ढा ने शिकायतकर्ता की शिकायत को सही पाया।
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