{"_id":"5da1f1f08ebc3e93db11b64e","slug":"former-rajya-sabha-mp-tarun-vijay-in-dehradun-literature-festival","type":"story","status":"publish","title_hn":"दून लिटरेचर फेस्ट में बोले पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय, कहा - विरासत खो रहा है उत्तराखंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दून लिटरेचर फेस्ट में बोले पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय, कहा - विरासत खो रहा है उत्तराखंड
Sun, 13 Oct 2019 10:21 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 13 Oct 2019 10:21 AM IST
विज्ञापन
तरुण विजय
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने कहा कि उत्तराखंड धीरे-धीरे अपनी विरासत खोता जा रहा है। राजधानी के पास ही गरुड़ अश्वमेघ यज्ञ वेदिका, चंबा के पास सूर्य मंदिर समेत 11 स्थान है। लेकिन अभी तक की सरकारों ने इन्हें विकसित करने के लिए कोई कदम तक नहीं उठाया। हाल यह है कि कई तक पहुंचने के लिए मार्ग तक नहीं है।
विज्ञापन
शनिवार को दून इंटरनेशनल स्कूल रिवरसाइड कैंपस में आयोजित देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल में ‘अननोन हेरिटेज ऑफ उत्तराखंड’ सत्र में पूर्व सांसद तरुण विजय ने कहा कि देहरादून से महज 20 किलोमीटर दूर जगत ग्राम है। यहां गरुड़ अश्वमेघ यज्ञ की वेदिका है। भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे 1700 साल पुराना बताया है। लेकिन, यहां तक पहुंचने के लिए संपर्क मार्ग तक नहीं है। अब सोचने वाली बात है कि जिस राजा शीलवर्मन द्वितीय ने इस यज्ञ को किया था, उसका साम्राज्य कितना बड़ा होगा। यहां पर इसके शिलालेख भी मौजूद हैं। लेकिन, अनदेखी इतनी है कि इन शिलाओं पर काई जम गई है।
विज्ञापन
वेदिका की ईंटे लोग ले जाने लगे हैं। लेकिन, सरकार ने इसे विकसित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। यदि इनका जिक्र पाठ्य पुस्तकों आदि में किया जाए तो उत्तराखंड की विरासत में यह स्वर्णिम अध्याय होगा। चंबा के पास सूर्य मंदिर की उपेक्षा करने की उन्होंने बात कही। 1200 साल पुराने इस मंदिर में जाने तक का मार्ग बदहाल है। शौचालय भी नहीं हैं। तरुण विजय ने ऐसे 11 स्थलों को अननोन हेरिटेज ऑफ उत्तराखंड की श्रेणी में रखा, जो सरकार की उपेक्षा का शिकार हैं।
विज्ञापन