पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल सुशील कुमार को इस जगह से था बेहद लगाव, यहां बनाया था अपना आशियाना
- गरीब बच्चों की मदद व उनकी पढ़ाई के लिए हमेशा रहते थे आगे
- लंबी बीमारी के बाद दिल्ली के में ली अंतिम सांस
- 1965 और 1971 में पाकिस्तान से हुई लड़ाई में भाग लिया था।
विस्तार
पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल सुशील कुमार के निधन से भवाली के लोग गमगीन हैं। उन्हें पहाड़ से विशेष लगाव रहा इसलिए उन्होंने भवाली से करीब सात किमी पहले गोलूधार में अपना आवास बनवाया था।
पूर्व नौसेना प्रमुख 15 साल से परिवार के साथ यहां आते-जाते थे। उनकी एक बेटी है जो लंदन में है। वह अक्सर कहा करते थे कि उन्हें पहाड़ से बेहद लगाव है, यही कारण है कि जब भी समय मिलता है वह यहां आ जाते हैं।
सेवानिवृत्त होने से पहले ही उन्होंने मन बनाया था कि वह पहाड़ में ही रहेंगे। सुशील कुमार को पशुओं से बेहद लगाव था। किसी भी पशु को बचाने के लिए हमेशा आगे रहते थे। गरीब बच्चों की मदद और उनकी पढ़ाई के लिए भी उन्होंने कई बार पहल की।
गरीब बच्चों को शिक्षा देना वह धर्म समझते थे।
गोलूधार निवासी मेजर जनरल सीपी तिवारी ने बताया कि सुशील कुमार अगस्त से बीमार चल रहे थे। जानवरों की सेवा करना और गरीब बच्चों को शिक्षा देना वह धर्म समझते थे। सेवानिवृत कमांडर और सैनिक स्कूल घोडखाल के पूर्व प्रधानाचार्य वीके बांगा ने बताया कि उन्हें उनके साथ काम करने का मौका मिला है।
देश भक्ति का जो जज्बा उनमें था उसे भुलाया नहीं जा सकता। भवाली होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद कपिल ने बताया लगभग सात साल पहले जून स्टेंट स्थित रक्षा रिट्रीट में पौधरोपण कार्यक्रम में उन्होंने अपने पहाड़ की खूबसूरती का बखान किया था।
लंबी बीमारी के बाद दिल्ली में ली अंतिम सांस
पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल सुशील कुमार का बुधवार की सुबह दिल्ली में निधन हो गया। वह 79 साल के थे और लंबे समय से बीमार थे। वह 1998 से 2001 तक नौसेना प्रमुख रहे।
सुशील कुमार का जन्म 1940 में नागरकोईल जिला कन्याकुमारी तमिलनाडु में हुआ था। उन्होंने 1965 और 1971 में पाकिस्तान से हुई लड़ाई में भाग लिया था। इसके अलावा गोवा में हुए मुक्ति संग्राम में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल से भी नवाजा गया था।