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शेरकी गांव सड़क कटाव के दौरान लोगों के घरों में घुसा मलबा
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लालपुल-मालदेवता मार्ग पर शुक्रवार रात हुई भारी बारिश के कारण मलबा आ गया था। जिससे मार्ग बंद हो गया। शनिवार को प्रशासन ने यहां मलबा हटाने के लिए जेसीबी लगाई। लेकिन, मशीनों से मलबा हटाने के दौरान कुछ मलबा शेरकी गांव के पास सड़क से नीचे बसे लोगों के घरों में जा घुसा। जिससे लोगों में आक्रोश पैदा हो गया। इसी दौरान पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत यहां क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और वह उनका विरोध करते हुए प्रदर्शन करने लगे। ग्रामीणों का आरोप है कि टिमली गांव में पूर्व मुख्यमंत्री की जमीन है। इसके लिए रास्ते से मलबा हटाने का कार्य किया जा रहा है। जिससे मलबा नीचे उनके घरों में घुस गया है और उनके सामान को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने जल्द से जल्द नुकसान का भुगतान करने की मांग उठाई। प्रदर्शन करने वालों में बालक बिष्ट, धनेश सिंह, दलीप सिंह बिष्ट, रवि राणा आदि मौजूद रहे। संवाद
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को पिछले महीने मालदेवता और सरखेत में आई भारी आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया। साथ ही आपदा में मारे गए लोगों के परिजनों से मिलकर उनको ढांढस बंधाया। उन्होंने पीड़ित परिवारों को आश्वासन दिया कि वह उनके साथ हमेशा खड़े हैं। इस दौरान उन्होंने आपदा पीड़ित बच्चों की शिक्षा के लिए व्यवस्था करने का भी आश्वासन दिया। संवाद
पिछले महीने एक के बाद एक दो बार आपदा का दंश झेल चुके सरखेत के ग्रामीणों के दिलों में अब आपदा का डर घर कर गया है। यहां जरा सी बारिश दहशत पैदा कर देती है। जिसका नतीजा है कि लोग अब अपना सामान हर वक्त पैक रखते हैं। जैसे ही बारिश की बूंदे पड़ती हैं यह लोग सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ लगा देते हैं।
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ग्रामीणों का आरोप है कि 28 अगस्त की आपदा से पहले भी प्रशासन को सतर्क किया गया था और मदद की गुहार लगाई गई थी। अगर पहले ही प्रशासन ने बचाव कार्य शुरू कर दिया होता तो उन्हें आपदा नहीं झेलनी पड़ती। सिस्टम की अनदेखी के कारण अब लोग यहां से पलायन को मजबूर हो गए हैं। कहा कि अभी भी कुछ मकान खतरे की जद में हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है। यहां स्थिति ऐसी है कि दो दिनों तक बारिश होने पर सब तबाह हो जाएगा। उधर समाजसेवी मनीष गोनियाल भी आपदा प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे और ग्रामीणों की समस्याओं को सुना। वहीं, सरखेत की पूर्व प्रधान आरती ने बताया कि बारिश होने पर गांव के लोग उनके यहां रात गुजारने आ जाते हैं। यहां शुरू में तो राहत कैंप लगाए गए, लेकिन अब कोई कैंप नहीं है। पूर्व प्रधान बिजेंद्र पंवार ने बताया कि 19 अगस्त को आई आपदा के बाद प्रशासन को कुछ खतरे के स्थान बताए गए थे। लेकिन, प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं ग्रामीणों को अभी तक मुआवजा भी नहीं दिया गया है।
अभी तक कृषि का मुआवजा नहीं दिया गया है। ये कृषि क्षेत्र की विधिवत माप के बाद ही दिया जाएगा। राहत कार्य पहले शवों को बरामद करने के लिए चलाया गया था। इसके बाद अन्य क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य किए गए।
सोहन सिंह रांगड़, तहसीलदार सदर
राहत कार्य लगातार जारी है। मशीनों से मलबा लगातार हटाया जा रहा है।
कुश्म चौहान, सिटी मजिस्ट्रेट
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पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को पिछले महीने मालदेवता और सरखेत में आई भारी आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया। साथ ही आपदा में मारे गए लोगों के परिजनों से मिलकर उनको ढांढस बंधाया। उन्होंने पीड़ित परिवारों को आश्वासन दिया कि वह उनके साथ हमेशा खड़े हैं। इस दौरान उन्होंने आपदा पीड़ित बच्चों की शिक्षा के लिए व्यवस्था करने का भी आश्वासन दिया। संवाद
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पिछले महीने एक के बाद एक दो बार आपदा का दंश झेल चुके सरखेत के ग्रामीणों के दिलों में अब आपदा का डर घर कर गया है। यहां जरा सी बारिश दहशत पैदा कर देती है। जिसका नतीजा है कि लोग अब अपना सामान हर वक्त पैक रखते हैं। जैसे ही बारिश की बूंदे पड़ती हैं यह लोग सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ लगा देते हैं।
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ग्रामीणों का आरोप है कि 28 अगस्त की आपदा से पहले भी प्रशासन को सतर्क किया गया था और मदद की गुहार लगाई गई थी। अगर पहले ही प्रशासन ने बचाव कार्य शुरू कर दिया होता तो उन्हें आपदा नहीं झेलनी पड़ती। सिस्टम की अनदेखी के कारण अब लोग यहां से पलायन को मजबूर हो गए हैं। कहा कि अभी भी कुछ मकान खतरे की जद में हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है। यहां स्थिति ऐसी है कि दो दिनों तक बारिश होने पर सब तबाह हो जाएगा। उधर समाजसेवी मनीष गोनियाल भी आपदा प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे और ग्रामीणों की समस्याओं को सुना। वहीं, सरखेत की पूर्व प्रधान आरती ने बताया कि बारिश होने पर गांव के लोग उनके यहां रात गुजारने आ जाते हैं। यहां शुरू में तो राहत कैंप लगाए गए, लेकिन अब कोई कैंप नहीं है। पूर्व प्रधान बिजेंद्र पंवार ने बताया कि 19 अगस्त को आई आपदा के बाद प्रशासन को कुछ खतरे के स्थान बताए गए थे। लेकिन, प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं ग्रामीणों को अभी तक मुआवजा भी नहीं दिया गया है।
अभी तक कृषि का मुआवजा नहीं दिया गया है। ये कृषि क्षेत्र की विधिवत माप के बाद ही दिया जाएगा। राहत कार्य पहले शवों को बरामद करने के लिए चलाया गया था। इसके बाद अन्य क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य किए गए।
सोहन सिंह रांगड़, तहसीलदार सदर
राहत कार्य लगातार जारी है। मशीनों से मलबा लगातार हटाया जा रहा है।
कुश्म चौहान, सिटी मजिस्ट्रेट