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सावधान, आपकी गाड़ियों पर है पुलिस की नजर

Wed, 15 Jan 2014 12:21 PM IST
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 15 Jan 2014 12:21 PM IST
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forgery on vehicle registration

राजधानी देहरादून में स्कूटर के नंबर पर कार और विक्रम के नंबर पर ट्रक चल रहे हैं।

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बाहरी प्रदेशों से चुराये गए वाहनों के रजिस्ट्रेशन में यहां फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है। इस नेटवर्क के पीछे गिरोह काम कर रहा है। पुलिस और एसओजी को इसकी भनक भी लगी है। अब एसटीएफ भी गिरोह की टोह में जुट गई है।
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वाहनों के रिकॉर्ड खंगाले
पुलिस और उत्तराखंड परिवहन विभाग ने बाहरी राज्यों खासतौर से हरियाणा से ट्रांसफर कर अपने यहां पंजीकृत वाहनों की पड़ताल कराई है। हाल ही में विभाग की टीमों ने हरियाणा के आरटीओ दफ्तरों में जाकर इन वाहनों के रिकॉर्ड खंगाले हैं।
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इस दौरान विभाग को कई चौंकाने वाली जानकारी हाथ लगी है। सूत्रों के मुताबिक पड़ताल में खुलासा हुआ है कि दून के आरटीओ दफ्तर में पंजीकृत कई कारों पर स्कूटर और बाइक के नंबर हैं। इसी तरह कई ट्रक विक्रम के नंबर से पंजीकृत हैं।

यह भी बताया जा रहा है कि इन नंबरों के वाहनों (स्कूटर, बाइक आदि) की चोरी की शिकायतें भी विभिन्न थानों में दर्ज हैं। परिवहन विभाग ने दून पुलिस से सूचनाओं का आदान-प्रदान किया है। पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।


ऐसे होता है फर्जीवाड़ा
दरअसल, जो आरटीओ दफ्तर ऑनलाइन नहीं हैं वहां पंजीकृत वाहनों के नंबरों को गिरोह से जुड़े लोग यहां ट्रांसफर कराते हैं।

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गिरोह के सदस्य फर्जी एनओसी दिखाकर वाहन को ट्रांसफर करने के लिए जैसे ही आवेदन करते हैं दून के आरटीओ दफ्तर से संबंधित वेरीफिकेशन के लिए डाक आ जाती है।

इसकी एक प्रति वाहन स्वामी को भी दी जाती है। इस एनओसी का फर्जी जवाब बनाकर सत्यापन की कापी दून भेज दी जाती है। इसमें आरटीओ दफ्तर की फर्जी मुहर, साइन और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता है।

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सूत्रों के अनुसार, सत्यापन के लिए डाक से गई प्रति को आरटीओ के कर्मचारियों की मिलीभगत से गायब कर दिया जाता है। परिवहन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, घपले से बचने के लिए अब ऐसे आरटीओ दफ्तरों की सूची बनाकर सत्यापन कराने के लिए आरटीओ के कर्मचारियों को भेजा जा रहा है।

‘आरटीओ दफ्तर से डालनवाला थाने में फर्जी रजिस्ट्रेशन कराने वाले वाहनों की सूचना दी गई है। इसकी छानबीन की जा रही है। राजपुर पुलिस ने भी ऐसे गिरोह के सदस्यों को कुछ दिन पहले पकड़ा था। एसओजी के साथ ही डालनवाला और राजपुर थानों की पुलिस के साथ इस पर मंथन किया गया है।’
- नवनीत भुल्लर, एसपी सिटी

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