फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   forgery in forest department sports quota

स्पोर्ट्स कोटे की भर्ती में हुआ बड़ा 'फर्जीवाड़ा', फर्जी 'खिलाड़ी' इस तरह बन गए फॉरेस्ट गार्ड

Mon, 04 Sep 2017 01:23 PM IST
ब्यूरो / मर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / मर उजाला, देहरादून Updated Mon, 04 Sep 2017 01:23 PM IST
विज्ञापन
forgery in forest department sports quota
Fraud

उत्तराखंड वन विभाग में विशेष अभियान चलाकर स्पोर्ट्स कोटे के तहत की गई भर्ती में फर्जीवाड़ा हुआ है।

विज्ञापन


स्पोर्ट्स कोटे के तहत भर्ती कर फॉरेस्ट गार्ड बनाए गए खिलाड़ियों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। इसके बाद डीएफओ देहरादून ने आरक्षियों के संबंध में वन मुख्यालय को रिपोर्ट भेजने के साथ बर्खास्त करने की संस्तुति की है।

दरअसल, प्रदेश में वन विभाग का नेशनल गेम होना था। इसमें नंबर वन बनने के लिए वन विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी। संवेदनशील क्षेत्रों के डीएफओ जंगल की सुरक्षा को छोड़कर देहरादून में जमे रहे।

विज्ञापन

2010-11 में स्पोर्ट्स कोटे के तहत खिलाड़ियों की विशेष भर्ती की योजना बनाई

forgery in forest department sports quota
दो फॉरेस्ट गार्ड के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई - फोटो : अमर उजाला
जब लगा कि मौजूदा वन कर्मियों के भरोसे पदक तालिका में ऊंचे पायदान पर पहुंचना मुश्किल है, तो वन मुख्यालय ने 2010-11 में स्पोर्ट्स कोटे के तहत खिलाड़ियों की विशेष भर्ती की योजना बनाई।

सामान्य तौर वन विभाग में डीएफओ स्तर पर भर्ती होती थी, लेकिन यह विशेष अभियान था, इसके मद्देनजर तय हुआ कि डीएफओ देहरादून के तहत एकीकृत भर्ती की जाए। इसके लिए बाकायदा चयन कमेटी आदि बनाने की औपचारिकता पूरी की गई और आननफानन में करीब 22 खिलाड़ियों को भर्ती कर फारेस्ट गार्ड बना दिया गया।

यह मामला कई साल दबा रहा। इसी बीच सूचना का अधिकार के तहत स्पोर्ट्स कोटे के तहत भर्ती हुए खिलाड़ियों के शैक्षिक और खेल गतिविधियों के प्रमाण पत्र मांगे गए। इसके बाद खुलासा हुआ कि दो खिलाड़ियों के शैक्षिक योग्यता के प्रमाण पत्र संदिग्ध हैं। डीएफओ देहरादून पीके पात्रो के अनुसार कुछ तथ्य सामने आए थे। इसके बाद दो फॉरेस्ट गार्ड के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई है, जो फर्जी पाए गए हैं।

इन फॉरेस्ट गार्ड के संबंध में वन मुख्यालय को रिपोर्ट भेजने के साथ ही आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। इन फॉरेस्ट गार्ड का वेतन रोक दिया गया गया है। अब बर्खास्तगी मुख्यालय स्तर से हो सकती है। प्रमुख वन संरक्षक (एचआरडी) मोनिष मल्लिक के अनुसार मामले में वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

गजब का ठाठ

forgery in forest department sports quota
नौकरी में भी आराम और सुविधा का खास ख्याल
स्पोर्ट्स कोटे के तहत फॉरेस्ट गार्डों के खूब ठाठ रहे हैं। इनको देहरादून वन प्रभाग के तहत भर्ती किया गया, लेकिन तैनात कुमाऊं के हल्द्वानी, तराई केंद्रीय और तराई पूर्वी वन प्रभाग में दी गई। ताकि उनको प्रशिक्षण, खेल गतिविधियों में शामिल होने के लिए पर्याप्त समय मिल जाए। खानपान से लेकर इनकी नौकरी में भी आराम और सुविधा का खास ख्याल रखा जाता है।

विजिलेंस जांच की नहीं जानकारी
वन विभाग में फॉरेस्ट गार्डों की भर्ती सवालों में रही है। इसमें राजाजी नेशनल पार्क आदि जगहों पर हुई भर्ती और अधिकारियों की भूमिका को लेकर आरोप लगते रहे हैं।

शासन ने 2010 के बाद प्रदेश के सभी वन प्रभागों में वन आरक्षियों की भर्ती की जांच विजिलेंस से कराने का फैसला किया। इसकी फाइल आदि बन गई है। हालांकि अभी वन महकमा ऐसी कोई भी जांच शुरू होने की बात से अनभिज्ञता जता रहा है।

प्रमुख वन संरक्षक राजेंद्र महाजन के अनुसार फिलहाल विजिलेंस जांच शुरू होने की जानकारी उन्हें नहीं है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अगर विजिलेंस जांच शुरू होती है, तो प्रभागों से फारेस्ट गार्डों के प्रमाण पत्र आदि मांगे जाएंगे, अभी तक ऐसे भी कोई भी मांग विभाग के पास नहीं पहुंची है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed