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Dehradun News: वन चौकियां पड़ीं वीरान, कैसे होगी वन संपदा की सुरक्षा
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सहिया। कालसी वन प्रभाग के साहिया समेत छह स्थानों पर बनाई गईं वन चौकियां वीरान पड़ी हैं। देखरेख के अभाव में भवन जर्जर हो गए हैं। वन चौकियों में पहले चार-चार वनकर्मी तैनात रहते थे। कालसी चकराता मोटरमार्ग से गुजरने वाले वाहनों की चेकिंग भी होती थी। लेकिन, लंबे समय से चौकी बंद होने से वन संपदा चोरी और तस्करी की आशंका बढ़ी हुई है।
जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में देवदार, चीढ़, बांझ, बुरांश, कैल सहित कई कीमती पेड़ होते हैं। वन संपदा की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने क्षेत्र में 24 वन चौकियों का निर्माण करवाया था। चौकियों में चार-चार वन कर्मियों की तैनाती भी की गई थी, लेकिन पिछले 15 साल से एक दर्जन वन चौकियां खस्ताहाल हैं। साहिया, मांख्टी, कोठा-तारली, कोरूवा, नागथात, बुधेर वन चौकी की हालत तो इतनी खराब है कि उसमें कर्मचारी तो दूर कोई जानवर भी रहने को तैयार नहीं है।
वनकर्मी मुख्यालय से ही रोज अपने-अपने क्षेत्रों में वनों की रक्षा करने आते-जाते रहते हैं। रात के समय जंगल कितने सुरक्षित हैं इस बात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। ग्रामीण रणवीर सिंह चौहान, मोहर सिंह चौहान, रण सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह चौहान, चतर सिंह तोमर ने बताया कि कई बार जर्जर वन चौकियों की मरम्मत की मांग की जा चुकी है, लेकिन वन विभाग चौकियों की दशा सुधारने को लेकर गंभीर नहीं है।
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चकराता वन प्रभाग के डीएफओ मयंक कुमार झा ने बताया कि वन चौकियों की हालत बहुत खराब है। इससे वन संपदा की तस्करी को रोकने की चुनौती बढ़ जाती है। वन चौकियों की मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
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जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में देवदार, चीढ़, बांझ, बुरांश, कैल सहित कई कीमती पेड़ होते हैं। वन संपदा की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने क्षेत्र में 24 वन चौकियों का निर्माण करवाया था। चौकियों में चार-चार वन कर्मियों की तैनाती भी की गई थी, लेकिन पिछले 15 साल से एक दर्जन वन चौकियां खस्ताहाल हैं। साहिया, मांख्टी, कोठा-तारली, कोरूवा, नागथात, बुधेर वन चौकी की हालत तो इतनी खराब है कि उसमें कर्मचारी तो दूर कोई जानवर भी रहने को तैयार नहीं है।
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वनकर्मी मुख्यालय से ही रोज अपने-अपने क्षेत्रों में वनों की रक्षा करने आते-जाते रहते हैं। रात के समय जंगल कितने सुरक्षित हैं इस बात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। ग्रामीण रणवीर सिंह चौहान, मोहर सिंह चौहान, रण सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह चौहान, चतर सिंह तोमर ने बताया कि कई बार जर्जर वन चौकियों की मरम्मत की मांग की जा चुकी है, लेकिन वन विभाग चौकियों की दशा सुधारने को लेकर गंभीर नहीं है।
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चकराता वन प्रभाग के डीएफओ मयंक कुमार झा ने बताया कि वन चौकियों की हालत बहुत खराब है। इससे वन संपदा की तस्करी को रोकने की चुनौती बढ़ जाती है। वन चौकियों की मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।