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वन, वन्यजीव की सुरक्षा करने वाले 100 पुरस्कृत
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 16 Nov 2013 10:23 PM IST
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उत्तराखंड के वन, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन कर्मियों को स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। शनिवार को राजपुर रोड स्थित मंथन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख वन संरक्षक डा.आरबीएस रावत ने यह सम्मान प्रदान किया। इसमें से गढ़वाल के 49 और कुमाऊं के 36 वन कर्मी शामिल थे। इसके अलावा पांच वन पंचायत के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।
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अपराध नियंत्रण के लिए कार्य करने वाले भी सम्मानित
वनों की सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले नौ, मानव-वन्यजीव संघर्ष नियंत्रण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य के लिए 11 को, सड़क के किनारे वृक्षारोपण करने के लिए 10 वन कर्मियों को पुरस्कृत किया गया। जंगलों में सफल वृक्षारोपण करने के लिए 23, वन्यजीवों की सुरक्षा और वन्यजीव अपराध नियंत्रण में बेहतर कार्य करने के लिए 17 वन कर्मियों को, नक्षत्र वाटिका लगाने, वनाग्नि रोक था के लिए दो-दो को सम्मानित किया गया।
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इसके अलावा बांस, जड़ी-बूटी, अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता, उच्च स्तरीय पौधशाला प्रबंधन, औषधिय प्रजातियों के संरक्षण सहित अन्य क्षेत्र में कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया।
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जब जयराज बने जज
मंथन में पुरस्कार कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले अपर प्रमुख वन संरक्षक पर्यावरण जयराज जज की भूमिका में नजर आए। उन्होंने वन कर्मियों से कहा कि बाघों को बचाने के लिए नया तरीका तलाशना होगा। अब वह समय खत्म हो गया कि बाघ के फंदा लगाने वालों के खिलाफ अज्ञात का मुकदमा जारी किया जाए। महीनों तक जांच पड़ताल की जाए। वन कर्मियों को अब मौके पर ही फंदा लगाने वाले किसी एक व्यक्ति को ढेर करना होगा। तभी बाघों को निर्ममता से मरने से बचाया जा सकता है।
वन्यजीव विंग अलग रहा
जंगलात महकमे के वन्यजीव विंग के एक भी वन कर्मी को पुरस्कार नहीं मिला। कार्बेट, राजाजी, गोविंद पशु विहार, नंदा देवी से किसी को पुरस्कार के लिए चयन नहीं किया गया था। इतना ही नहीं बल्कि वन्यजीव विंग का कोई भी अधिकारी भी कार्यक्रम के दौरान नजर नहीं आया
इनके जजबे को सलाम
मृतक वन आरक्षी अमर देव पालीवाल और वन क्षेत्राधिकारी नत्थी लाल डोभाल के जजबे को हर वन कर्मियों ने सलाम किया। ये दोनों ने मिलकर टिहरी के जंगल में फंसे तीन बच्चे और महिला को 2011 में बचाया था। इसके अलावा एक गुलदार को भी बचाने में इन दोनों मिलकर काम किया था। मृतक अमरदेव पालीवाल की पत्नी कमलेश ने यह पुरस्कार प्राप्त किया। कमलेश ने कहा कि यह पुरस्कार अगर उनके पति लेते तो और अच्छा लगता। अप्रैल 2013 में हार्ट अटैक में उनकी मृत्यु हो गई थी।