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खुलासा: रखवाले ही बन गए जंगल की जिंदगियों के जानी दुश्मन

Fri, 07 Aug 2015 08:15 AM IST
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 07 Aug 2015 08:15 AM IST
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forest officer gave permission of illegal hunting in uttarakhand.

जब प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक ही वन्य जीवों का दुश्मन बन जाए तो फिर वन्य जीवों की रक्षा करेगा कौन? यह सवाल आज उत्तराखंड के सामने है।

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2013 के तत्कालीन प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक एसएस शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने वन्य जीवों के दुश्मनों से मिलकर न सिर्फ अवैध शिकार की अनुमति दी बल्कि इस मामले में हो रही जांच भी प्रभावित करने की कोशिश की। इस बात का खुलासा अपर मुख्य सचिव एस. राजू की जांच रिपोर्ट में हुआ है।
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इस खुलासे के बाद शर्मा के खिलाफ अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली 1968 के तहत कार्रवाई की संस्तुति की गई है। वहीं वन जीव अपराधियों से संलिप्तता के मामले में पुलिस की अनुसंधान शाखा से जांच कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। शर्मा वही अधिकारी हैं जिन्होंने केदारनाथ वन्य विहार के ऊ पर बिना एनओसी हेलीकॉप्टरों के उड़ान के संबंध में उप वन संरक्षक आकाश कुमार की रिपोर्ट दबा दी थी।

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शिकारियों को देते रहे जंगली जानवरों की मारने की छूट

forest officer gave permission of illegal hunting in uttarakhand.

प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक रहे एसएस शर्मा के खिलाफ कई शिकायतें शासन से की गईं थी। 14 अगस्त 2014 को तत्कालीन मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने अपर मुख्य सचिव एस राजू से जांच कराने की संस्तुति की। अपर मुख्य सचिव की जांच में न सिर्फ प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक के खिलाफ आरोप सही पाए गए बल्कि इस मामले में अनुभाग-एक की संलिप्तता भी सामने आई।

अपर मुख्य सचिव की रिपोर्ट में बताया गया है कि अपर प्रमुख वन संरक्षक एसके दत्ता की वन्य जीव अपराधों की रिपोर्ट प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक शर्मा ने दरकिनार कर दी थी। रिपोर्ट में शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने वन्य जीव अपराधों के आरोपियों से मिलकर जांच को प्रभावित किया है।

इतना ही नहीं जंगली सूअर, बंदर और नीलगाय मारने के लिए गलत तरीके से अधिकार दे दिए। रिपोर्ट में कहा गया कि जब दत्ता ने वन्य जीव मामले में रिपोर्ट भेजी तो रेंज अधिकारी को शर्मा ने निर्देश दिए कि दत्ता की बातें न सुनें। तराई क्षेत्र में शिकार होता है तो प्रमुख वन्य संरक्षक, वन्य जीव की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

जांच में खुल गई अनुभाग की पोल

forest officer gave permission of illegal hunting in uttarakhand.
अपर मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि शर्मा ने संरक्षित क्षेत्रों के अतिक्रमण प्रकरणों में बिना किसी सर्वेक्षण के अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत किए थे। जांच के बाद अपर मुख्य सचिव एस. राजू ने अब प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण डॉ. रणवीर सिंह से कहा है कि अब वे खुद तय करें कि उन्हें किस अनुभाग और अधिकारी से जांच करानी है।

रिपोर्ट के अनुसार जांच में अनुभाग की संलिप्तता भी उजागर हो गई। वन्य जीवों के शिकार का मामला राष्ट्रीय व्याघ्र प्राधिकरण के संज्ञान में भी आया था। इस पर प्राधिकरण ने पत्र भेजा था।

उच्च न्यायालय के निर्देशों के क्रम में मुख्यमंत्री ने सीबीसीआईडी जांच कराने के लिए कहा, लेकिन अनुभाग-1 ने मामला एक महीने तक दबाए रखा। अपर मुख्य सचिव ने अनुभाग अधिकारी के खिलाफ भी जांच की संस्तुति की गई है।

यह भी आरोप
-राजाजी नेशलन पार्क में निर्मल कुंज आश्रम प्रकरण में सीधी कार्रवाई न करना
-विभाग में अवैध नियुक्ति में संलिप्त होना
-जांच के दौरान कई पत्रावलियों को उपलब्ध नहीं कराया
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