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ऐसे नहीं थमेगी ये आग, वन कानूनों की हो समीक्षा : जोशी
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 03 May 2016 12:39 AM IST
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अनिल जोशी
- फोटो : AmarUjala
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हैस्को के संस्थापक पद्मश्री अनिल जोशी ने कहा कि जंगल जिस तरह आग से धधक रहे हैं, इसे देखते हुए वन कानूनों की समीक्षा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वन कानून में स्थानीय लोगों के अधिकार खत्म कर दिए गए हैं।
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जीएमएस रोड स्थित एक होटल में मीडिया से बातचीत में है गांव बचाव अभियान एवं हैस्को के संस्थापक अनिल जोशी ने कहा कि उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग अब तक की सबसे बड़ी आग है। आग बुझाने के लिए पहली बार सेना और वायु सेना को बुलाना पड़ा है।
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फॉरेस्ट गॉर्ड के भरोसे आग पर काबू पाना संभव नहीं
उन्होंने कहा कि कई हेक्टेयर वन क्षेत्र में एक फॉरेस्ट गार्ड के भरोसे आग बुझाना संभव नहीं है। वन विभाग की ओर से जो सीजनल फायर वाचर रखे जाते हैं, उन्हें मात्र तीन महीने के लिए रखा जाता है और इसका भी उन्हें मानदेय नही मिलता। उन्होंने कहा कि जंगलों में पेड़ों की पत्तियों और झाड़ियों का उपयोग स्थानीय लोग स्वरोजगार के लिए कर सकते हैं।
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पूर्व में इसका उपयोग खाद एवं अन्य कार्यों के लिए होता आया है, लेकिन वर्तमान कानून ने इस पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि समय आ चुका है कि वन कानून की समीक्षा हो। उन्होंने जंगलों में लगी आग को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बताते कहा कि यहां के वन देश दुनिया की हवा, मिट्टी पानी की रक्षा करते हैं।