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उत्तराखंड: बढ़ती गर्मी के साथ जंगलों के धधकने का सिलसिला भी तेज,  24 घंटे में सर्वाधिक 31 जगह वनाग्नि की घटनाएं 

Wed, 06 Apr 2022 11:45 AM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 06 Apr 2022 11:45 AM IST
सार

वनाग्नि की घटनाओं में चिंताजनक पहलू यह है कि आग की सर्वाधिक घटनाएं आरक्षित वन क्षेत्रों में सामने आ रही हैं। गढ़वाल में आरक्षित वन क्षेत्र में 14 स्थानों पर जबकि वन पंचायत क्षेत्र में तीन स्थानों पर आग लगी। कुमाऊं क्षेत्र में आरक्षित वन क्षेत्र में 13 स्थानों पर आग लगी। 

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forest fire,  Maximum 31 incidents of forest fire in 24 hours
उत्तराखंड में जंगल की आग - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

प्रदेश में बढ़ती गर्मी के साथ वनों के धधकने का सिलसिला भी तेज हो गया है।  प्रदेशभर में 24 घंटे में इस फायर सीजन में सर्वाधिक 31 स्थानों पर जंगलों में आग लगी है। गढ़वाल में 17, कुमाऊं में 13 और राष्ट्रीय उद्यान में वनाग्नि की एक घटना घटित हुई। 24 घंटे में करीब 35 हेक्टेयर वन संपदा को नुकसान पहुंचा है।

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वनाग्नि की घटनाओं में चिंताजनक पहलू यह है कि आग की सर्वाधिक घटनाएं आरक्षित वन क्षेत्रों में सामने आ रही हैं। बीते 24 घंटे में गढ़वाल में आरक्षित वन क्षेत्र में 14 स्थानों, जबकि वन पंचायत क्षेत्र में तीन स्थानों पर आग लगी। इसी तरह से कुमाऊं क्षेत्र में आरक्षित वन क्षेत्र में 13 स्थानों पर आग लगी।
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मुख्य वन संरक्षक, वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन निशांत वर्मा ने बताया कि इन घटनाओं में कुल 30.95 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र व 4.5 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि इस फायर सीजन में वनाग्नि की अब तक 214 घटनाएं हो चुकी हैं। जबकि 260.16 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। कुल साढ़े सात लाख रुपये से अधिक की क्षति का आकलन किया गया है।

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दो दिन से जल रहे किमोली और सिमली के जंगल

चमोली कर्णप्रयाग में गर्मी का सीजन शुरू होते ही चमोली जिले के जंगलों में आग लगनी शुरू हो गई है। कपीरी पट्टी के किमोली सहित सिमली क्षेत्र के रयाल, कोलाडुंगरी, फलोटा व घूलाड़ि के जंगलों में सोमवार शाम से भीषण आग लगी है। आग से बांज, बुरांश, फनियाट सहित चीड़ के सैकड़ों पौधे जल गए हैं। जबकि पूरे क्षेत्र में चारों तरफ धुआं छाया हुआ है। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे वन विभाग के कर्मचारी आग बुझाने में जुटे हैं।

 

लाखों की वन संपदा जल गई

जंगलों में लगी आग से लाखों की वन संपदा जल गई है। गोवर्धन डिमरी, अशोक डिमरी, बीरेंद्र कुमार व जितेंद्र पंवार ने कहा कि वन विभाग प्रतिवर्ष जंगलों में पौधरोपण और आग बुझाने के लिए करोड़ों रुपये का बजट खर्च दिखाता है, इसके बावजूद न तो जंगल में हरियाली आती और न ही आग बुझ पाती है। उन्होंने डीएफओ से जंगलों की सुरक्षा की मांग की। 

 

फायर कर्मियों ने बुझाई जंगल की आग

चमोली गोपेश्वर नए बस स्टैंड के पास जंगल में लगी आग को फायर कर्मियों ने बुझा दी। गनीमत रही कि आग बुझ गई नहीं तो आग यहां घरों तक पहुंच सकती थी। जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह करीब सात बजे कुछ महिलाओं ने फायर स्टेशन गोपेश्वर में आकर बताया कि गोपेश्वर के नए बस स्टैंड के पास जंगल में आग लगी हुई है। सूचना पर फायर कर्मी मौके पर पहुंचे और कुछ देर में ही जंगल की आग को काबू कर लिया, जिससे जंगल का बड़ा हिस्सा जलने से बच गया। यहां आसपास लोगों के घर भी हैं, यदि आग तेज हो जाती तो लोगों के घरों को भी नुकसान हो सकता था।
 

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