बारहसिंघों पर लगेंगे रेडियो कॉलर, उठेगा कई रहस्यों से पर्दा
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उत्तराखंड के बारहसिंघों पर रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे कई रहस्यों से पर्दा उठेगा। जानिए, क्या खुलेंगे राज...
केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने झिलमिल कंजर्वेशन रिजर्व में बारहसिंघों पर रेडियो कॉलर लगाने की इजाजत दे दी है। प्रथम चरण में चार बारहसिंघों पर ये कॉलर लगाए जाएंगे।
जिनके जरिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) के वैज्ञानिक इनके आचार-व्यवहार, माइग्रेशन, आनुवांशिकी, बीमारी समेत अन्य पहलुओं पर अध्ययन करेगें। इसमें सामने आने वाले नतीजों के आधार पर बारहसिंघों के संरक्षण को न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि उत्तरप्रदेश की सीमा में भी प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
बारहसिंघों का राज्य में इकलौता वासस्थल है झिलमिल
हरिद्वार वन प्रभाग की चिड़ियापुर रेंज में गंगा नदी के किनारे स्थित झिलझिल कंजर्वेशन रिजर्व राज्य में इकलौता बारहसिंघा का वासस्थल है।
प्रमुख वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डीवीएस खाती के मुताबिक इस सिलसिले में बारहसिंघों पर रेडियो कॉलर लगाने के लिए विभाग के प्रस्ताव को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने चार बारहसिंघों पर रेडियो कॉलर लगाने की मंजूरी दे दी है।
अगले माह की शुरुआत में इन्हें लगाकर वन्यजीव संस्थान अध्ययन शुरू कर देगा। जरूरत पड़ने पर अगले चरण में अन्य बारहसिंघों पर भी रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति के लिए आवेदन किया जाएगा।