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उत्तराखंड के जंगलों में घूम रही इस बाघिन ने किया ऐसा चौंक गया वन विभाग

Mon, 10 Apr 2017 11:59 AM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Mon, 10 Apr 2017 11:59 AM IST
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forest department confused on tigress behavior
tigress - फोटो : amar ujala

उत्तराखंड के जंगलों में घूम रही बाघिन का व्यवहार वन विभाग की टीम के लिए अनसुलझे सवाल छोड़ गया है। ये जंगली बाघिन पेड़ से उतरी, पानी पिया और चली गई।

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टनकपुर के बस्तिया गांव में रविवार रात तक डेरा जमाए बैठी रही बाघिन कई ऐसे सवाल भी छोड़ गई है, जिन्हे सुलझाने के लिए वन विभाग को अब कम से कम एक हफ्ते तक जंगल के चप्पे-चप्पे पर निगाह रखनी पड़ेगी।
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बस्तियां गांव के लोग भले ही अब राहत महसूस कर रहे हों, लेकिन बस्तिया की बाघिन के कारण वन विभाग के अधिकारियों को अब माथापच्ची करनी पड़ रही है।

टनकपुर के बस्तिया गांव में शनिवार को एक बाग में बाघिन को देखा गया था। यह बाघिन शनिवार रात तीन बजे तक बाग में डेरा जमाए रही। एक हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ से घिरी रही यह बाघिन चुपचाप चली तो गई, पर अपने पीछे कई सवाल भी छोड़ गई।

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गोलियां आसपास दागने के बाद भी बाघिन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की

forest department confused on tigress behavior
tiger

वन विभाग के अधिकारियों के सामने बस्तिया की बाघिन ने पहला सवाल वन्य जंतुओं के स्वभाव में आ रहे बदलाव को लेकर खड़ा किया है।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बाघिन आसानी से पेड़ पर नहीं चढ़ती। बस्तिया की बाघिन ने पूरी रात पेड़ पर ही डेरा जमाए रखा। दूसरी हैरान करने वाली बात यह थी कि राइफल से आठ गोलियां आसपास दागने के बाद भी बाघिन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की।

योजना यह थी कि बाघिन गोली की आवाज सुनकर पेड़ से उतरकर जंगल में भाग जाए।

पांच लीटर पानी पीने के बाद जंगल की तरफ चली गई बाघिन

forest department confused on tigress behavior

ऐसा न होने पर पेड़ के नीचे एक बर्तन में भरकर पानी रखा गया। अधिकारियों के मुताबिक रात तीन बजे शांति होने पर बाघिन चुपचाप पेड़ से उतरी और करीब पांच लीटर पानी पीने के बाद जंगल की तरफ चली गई।

इससे ऐसा लगता है कि बाघिन को शरीर में पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा है तो सवाल यह भी है कि क्या बाघिन गरमी और प्यास से परेशान होकर मानव बस्ती की ओर चली आई थी? क्या जंगल में पानी के स्रोतों में कोई बदलाव हुआ है?

अधिकारियों का कहना है कि बाघिन नरभक्षी नहीं है और व्यवहार से यह भी साबित कर रही है कि मानव को वह अपने लिए अधिक खतरा नहीं मान रही है। जिस महिला ने इस बाघिन को शनिवार सुबह बाग में देखा था, वह एक बार पहले भी उसी रास्ते  से होकर गुजरी थी और उस समय भी बाघिन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की थी।

बाघिन वापस जंगल में चली गई है, पर अब वन विभाग की नींद उड़ी हुई है। एक अधिकारी के मुताबिक एक हफ्ते तक पूरे क्षेत्र की कांबिंग कर देखा जाएगा कि कहां और क्या-क्या बदलाव हुए हैं। वन विभाग अलर्ट है और बस्तिया के लोगों को भी बिना घबराए अलर्ट रहने को कहा गया है।

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