विदेशी कर्मचारियों के वेतन पर भी EPFO की नजर, जांच पड़ताल में जुटे अधिकारी
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प्रदेश की कंपनियों में काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों का वेतन भी ईपीएफओ की जांच के दायरे में आ गया है। दरअसल, कंपनियां इन कर्मचारियों के वेतन को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर पीएफ में गड़बड़ी कर रही हैं। ऐसी कुछ कंपनियों की सूची दिल्ली से देहरादून को भेजी गई है। अब दून कार्यालय की ओर से कंपनियों की जांच पड़ताल की जाएगी।
ईपीफओ के क्षेत्रीय आयुक्त मनोज कुमार यादव ने बताया कि उत्तराखंड में जो जानकारी आई है ,उस हिसाब से तो करीब 30 ही विदेशी कर्मचारी काम कर रहे हैं लेकिन यह संख्या इससे अधिक हो सकती है।
उन्होंने बताया कि नियम के हिसाब से विदेशी कर्मचारियों को पांच से छह लाख रुपये वेतन देने के चलते इतनी ही रकम पर पीएफ कटना चाहिए। लेकिन कंपनियां इन कर्मचारियों का वेतन अलग-अलग टुकड़ों में बांटकर उसमें से केवल 50 से 60 हजार रुपये बेसिक सैलरी पर ही पीएफ दे रही हैं।
इसके लिए ईपीएफओ ने टीम गठित कर दी है। यह टीम अब सभी ऐसी कंपनियों की पड़ताल करेगी, जहां विदेशी कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों के पीएफ जमा करने में हुई गड़बड़ियों पर कार्रवाई की जाएगी।
पर्सलन लोन से भी महंगी है पेनल्टी
पीएफ के बकाया पर लगने वाला जुर्माना पर्सनल लोन से भी महंगा है। ईपीएफओ कमिश्नर मनोज कुमार यादव ने बताया कि बकाया दो महीने से कम होने पर पांच प्रतिशत, दो से चार माह होने पर 10 प्रतिशत, चार से छह माह होने पर 15 प्रतिशत और छह माह से ऊपर होने पर 25 प्रतिशत जुर्माना लगता है।
इसके साथ ही 12 प्रतिशत ब्याज भी लगता है। यह हर महीने का जुर्माना है। यानी अगर किसी कंपनी के ऊपर पीएफ का छह माह से अधिक बकाया हो चुका है तो उसे 25 प्रतिशत जुर्माने के साथ ही 12 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज भी देना होगा। यह रकम हर महीने बढ़ती जाएगी।