उत्तराखंड में भगवान को भी नहीं छोड़ा, मंदिर में चढ़ने वाला प्रसाद तक मिलावटी
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देहरादून स्थित प्रेस क्लब में संस्था के सचिव डॉ. ब्रजमोहन शर्मा ने रिपोर्ट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि संस्था ने कुल 1685 नमूने एकत्र किए थे। इनमें 1392 नमूनों में मिलावट पायी गयी। प्रदेश में कुल 46 स्थानों से 36 प्रकार के खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए थे।
शर्मा ने बताया कि सबसे कम आगराखाल में 50 फीसद व अगस्त्यमुनि में 62 प्रतिशत मिलावट पाई गई। घाघरिया और उत्तरकाशी में सबसे अधिक 95 प्रतिशत और उत्तरकाशी तथा जानकी चट्टी में 93 प्रतिशत मिलावट पाई गई। सरसों के तेल, रोली, लड्डू, बताशा व जलेबी जैसे सर्वाधिक उपभोग में आने वाले सामानों में 100 प्रतिशत मिलावट पाई गई है। केदारनाथ में 76 प्रतिशत, बदरीनाथ में 83 प्रतिशत, गंगोत्री में 85 प्रतिशत व यमनोत्री में 83 प्रतिशत मिलावट मिली।
प्रसाद चढ़ाने वाली सामग्री में भी भारी मिलावट
डॉ. शर्मा ने कहा कि मंदिरों में भगवान के दर्शन व प्रसाद चढाने व बांटने के लिए जाते हैं। आज प्रसाद भी मिलावट के बिना नहीं है। लगभग 191 नमूनों में 79 प्रतिशत मिलावट पाई गई। रोली में 100 प्रतिशत, इलाइची में 67 प्रतिशत, शुद्ध घी में 72 प्रतिशत, शहद में 80 प्रतिशत व गोले में 56 प्रतिशत मिलावट पाई गई। इनमें लेड, हाइड्रो, नकली घी, नकली शहद आदि की भरमार है।
मसालों के 510 नमूनों में 431 में मिलावट।
खाद्य तेल के 150 नमूनों में 142 में मिलावट।
दूध व उससे बने खाद्य पदार्थों के 234 नमूनों में 170 में मिलावट।
मिठाईयों के 234 नमूनों में 223 में मिलावट।
चाय व काफी के 165 नमूनों में 129 में मिलावट।
दाल व बेसन के 110 नमूनों में 82 में मिलावट।