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प्रत्याशियों ने बदला प्रचार का तरीका, गीतों से हो रहा है प्रचार
ओम प्रकाश जोशी/ अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Tue, 31 Jan 2017 12:17 PM IST
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चुनाव
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सीमांत जनपद उत्तरकाशी में प्रत्याशियों ने इस बार चुनाव में प्रचार करने का अनोखा तरीका अपनाया है। प्रत्याशियों ने क्षेत्रीय गायकों से अपने ऊपर गीत तैयार करवाए हैं।
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अंध्यारू मिटाणु उजालु करौण रे, अबकी बारी----, त्वैन आईटीआई खुलाई ओबीसी कराई भैजी..., तेरे आगे अच्छे-अच्छों के बदल गए सुर और ताल, तेरा ईमान बेमिसाल भाई ...आदि गानों की धुन ही इन दिनों गली मोहल्ले में सुनने को मिल रही है। इन गीतों को रोड शो और पदयात्रा से लेकर सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जा रहा है।
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अभी तक चुनाव में फिल्मी और गढ़वाली गीतों की धूम रहती थी, लेकिन इस बार प्रत्याशियों ने नया तरीका अपनाया है। अब प्रत्याशी स्वयं पर गीत तैयार करवा रहे हैं। इसके लिए वे क्षेत्रीय गायकों और लोक गायकों की मदद ले रहे हैं। इन गीतों में विकास के बड़े-बड़े दावे भी किए जा रहे हैं।
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इसको प्रत्याशी प्रचार का व्यापक माध्यम भी मान रहे हैं। आमतौर पर जनसभा में नेताजी के भाषण के कुछ देर बाद लोग ऊब जाते हैं। गीतों को सब पसंद कर रहे हैं। तीन विधानसभा सीटों वाले उत्तरकाशी जनपद में 26 प्रत्याशी नामांकन करवा चुके हैं, जिनमें से कुछ प्रत्याशी प्रचार का यह माध्यम अपना रहे हैं। दूसरी ओर कई लोक गायक प्रत्याशियों से मिले प्रस्ताव को ठुकरा भी रहे हैं।
लोक गायक व कवि ओम बंधाणी के अनुसार उन्हें भी तीन प्रत्याशी अभी तक अपने ऊपर गीत तैयार कर गाने के लिए संपर्क कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। क्योंकि वे लोक गाथाओं एवं लोक भाषा के संरक्षण पर काम करते आ रहे हैं और इन्हीं पर गीत तैयार करते और गाते हैं।