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Rudraprayag: फूलों की खेती से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर, तीन गांवों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई शुरुआत
Sat, 27 Jun 2026 06:54 PM IST
Renu Saklani
सतीश भट्ट, संवाद न्यूज एजेंसी, जखोली (रुद्रप्रयाग)
सतीश भट्ट, संवाद न्यूज एजेंसी, जखोली (रुद्रप्रयाग)
Published by: Renu Saklani
Updated Sat, 27 Jun 2026 06:54 PM IST
सार
पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका के नए विकल्प तैयार करने की दिशा में महिलाएं अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नकदी फसलों की ओर रुख कर रही हैं। रुद्रप्रयाग जिले में शुरू हुई एक पायलट पहल के तहत गेंदा फूल की खेती को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
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फूलों की खेती
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में पारंपरिक कृषि से हटकर नकदी फसलों को बढ़ावा देकर आजीविका सुधारने के प्रयास में महिलाएं आगे आ रही हैं। रुद्रप्रयाग में उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना के तहत तीन गांवों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गेंदा फूल की खेती शुरू की गई है।
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इसके के लिए मेंदनपुर गांव में दो समूहों की 17 महिलाएं और सेमा गांव में एक समूह की छह महिलाएं व लौंगा गाव के एक समूह की पांच महिलाएं करीब 56 नाली भूमि पर फूलों की फसल तैयार कर रही हैं। चारधाम यात्रा मार्ग पर गेंदे के फूलों की अधिक मांग को देखते हुए यह प्रयोग पहाड़ों में स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का असरदार तरीका बन सकता है।
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काश्तकार कंचन सजवाण बताती हैं कि बाजार की उचित व्यवस्था होना जरूरी है। उन्होंने करीब 250 किलो फूल बेचकर आर्थिकी मजबूत की है। वहीं सुमन देवी, कंचन जगवाण, उर्मिला देवी, सीना देवी और राजेश्वरी देवी जैसी महिला किसानों का कहना कि वे मेहनत कर कारोबार को बढ़ाना चाहती हैं।
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यूनिट इंचार्ज तिलवाड़ा ओमप्रकाश ने बताया कि आने वाले समय में फूल उत्पादन का क्षेत्र और बढ़ाया जाएगा। महिलाओं को उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए बाजार व्यवस्था के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों को सीधे केदारनाथ यात्रा मार्ग के स्थानीय बाजारों, मंदिर समितियों और होटल व्यवसायियों से जोड़ दिया जाए, तो यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होगा और रिवर्स माइग्रेशन और महिला सशक्तिकरण का कार्य सफल होगा।