फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Floor Area Ratio construction right for landlord.

जमीन देने वालों को उत्तराखंड सरकार ने दिया बड़ा अधिकार

Wed, 17 Feb 2016 01:25 PM IST
अनिल चंदोला/ अमर उजाला, देहरादून
अनिल चंदोला/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 17 Feb 2016 01:25 PM IST
विज्ञापन
Floor Area Ratio construction right for landlord.

उत्तराखंड सरकार की किसी भी जनकल्याणकारी योजना के लिए जमीन देने वालों को अब उसके फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) के मुताबिक निर्माण का अधिकार मिलेगा।

विज्ञापन


इस अधिकार का प्रयोग भूस्वामी प्राधिकरण क्षेत्र की किसी भी अन्य संपत्ति पर कर सकेगा। भूस्वामी चाहे तो निर्माण के इस अधिकार को किसी अन्य को बेच भी सकेगा।
विज्ञापन


एमडीडीए की ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट योजना के तहत कोई भी व्यक्ति सरकार को अपनी जमीन दे सकता है। इसके बदले सरकार भूस्वामी की पैसे नहीं देगी। दी गई जमीन के एफएआर के बराबर निर्माण का अधिकार देगी। इसके लिए भूस्वामी को एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


भूस्वामी चाहे तो इस प्रमाण पत्र के आधार पर निर्धारित एफएआर की अपनी संपत्ति में इस्तेमाल करे या इसे किसी अन्य को बेच दे। इस अधिकार का प्रयोग केवल एक बार किया जा सकेगा। एमडीडीए ने इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है। भविष्य में अन्य विभागों में भी योजना को लागू किया जा सकता है।

क्या है फ्लोर एरिया रेशियो

Floor Area Ratio construction right for landlord.

फ्लोर एरिया रेशियो किसी भी प्लॉट में कवर होने वाला एरिया है। प्लॉट एरिया गुणा एफएआर के फार्मूले से कुल कवर एरिया की गणना की जाती है।

उदाहरण के लिए सौ वर्ग फीट के किसी प्लॉट में अधिकतम कवर एरिया 75 फीसदी और अनुमन्य एफएआर 1.80 है। ऐसे में उसे प्लॉट में अधिकतम 100 गुणा 1.8 यानी 180 वर्ग फीट ही निर्माण किया जा सकता है। एफएआर की गणना सड़क की चौड़ाई, प्लॉट साइज और लैंड यूज के आधार पर होती है।

भूमि अधिग्रहण की दिक्कतें
अभी तक किसी भी सरकारी योजना के लिए सरकार भूस्वामी से जमीन लेती है। इसमें स्पेशल लैंड एक्यूजेशन अफसर सर्किल रेट के आधार पर जमीन का मूल्य निर्धारित करता है। इसके बाद संबंधित भूस्वामी को जमीन का पैसा दिया जाता है। यह प्रक्रिया बेहद लंबी और जटिल है। इसमें कई बार कई-कई साल का समय लग जाता है।

अलग-अलग कैटेगरी में इस्तेमाल
प्रस्ताव में शहर को जनसंख्या घनत्व के आधार पर ए, बी, सी और डी कैटेगरी में बांटा गया है। ए श्रेणी में जमीन देने वाला बी, सी या डी कैटेगरी वाले इलाके में ही अपने अधिकार का प्रयोग कर सकेगा। इसी तरह बी और सी वाले भी अगली कैटेगरी में ही निर्माण कर सकेंगे। अधिक जनसंख्या वाले इलाकों में निर्माण नहीं हो सकेगा।

एमडीडीए की ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट योजना से एक तरह जहां सरकारी योजनाओं के लिए लोग स्वेच्छा से जमीन देंगे, वहीं उन्हें भी अधिक फायदा मिलेगा। शहर के ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों से भीड़ भी कम होगी और नए इलाके विकसित होंगे।
- आर मीनाक्षी सुंदरम, उपाध्यक्ष, एमडीडीए

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed