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देहरादूनः सात फ्लैट सील, उच्च न्यायालय के आदेश पर पहुंची पुलिस और एलआईसी की टीम

Fri, 14 Jun 2019 12:34 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 14 Jun 2019 12:34 PM IST
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flat sealed in dehradun connaught place
प्रतीकात्मक

उच्च न्यायालय के आदेश पर कनाट प्लेस में सीलिंग की कार्रवाई करने पहुंची एलआईसी की टीम ने सात खाली फ्लैट सील किए। जबकि 12 अन्य गोदाम और फ्लैट खाली करने के लिए मेयर और विधायक के कहने पर किराएदारों को तीन माह का समय दिया गया है। उस समय टीम 59 अन्य यूनिट (फ्लैट और गोदाम) भी सील करेगी।

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चकराता मार्ग स्थित एलआईसी का भारत इस्टेट, न्यू कनाट प्लेस बिल्डिंग में किराएदारों को लेकर विवाद चल रहा है। एलआईसी काबिज किराएदारों का किराया बढ़ाना चाहती है, लेकिन किराएदार इस पर राजी नहीं है। मामला अलग-अलग स्तर की न्यायालयों में चला। लेकिन सभी जगहों से किराएदारों को झटका लगा। अंतिम निर्णय नवंबर-2018 में उच्च न्यायालय नैनीताल ने दिया। इसने सभी किराएदारों का अवैध कब्जेदार बताया। साथ ही एलआईसी को इस्टेट की 66 यूनिट पर कब्जा लेने को कहा था।
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न्यायालय के आदेश पर एलआईसी के बिल्डिंग इंस्पेक्टर डीके सिंह के नेतृत्व में बृहस्पतिवार को टीम 19 यूनिट को सील करने के लिए कनाट प्लेस पहुंची। भारी संख्या में पुलिस फोर्स को देखते ही दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दी। उन्होंने दुकानें खाली करने के लिए कुछ मोहलत टीम में शामिल अधिकारियों से मांगी, लेकिन अधिकारी दुकानें खाली करने पर अड़े रहे। इसी बीच मौके पर मेयर सुनील उनियाल गामा और विधायक खजान दास भी पहुंच गए। उन्होंने अधिकारियों से बात कर दुकानदारों को तीन माह की मोहलत दी। उसके बाद टीम ने वहां खाली पड़े सात फ्लैट सील किए। बिल्डिंग इंस्पेक्टर डीके सिंह ने बताया कि तीन माह बाद बाकी 59 यूनिट सील की जाएंगी। 
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एक के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस
लगभग चार दशक से भी ज्यादा समय से यहां एक बड़े दुकानदार को न्यायालय ने 31 मई तक सभी आठ गोदाम खाली करने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके दुकानदार ने कोई सामान नहीं उठाया। एलआईसी के अधिवक्ता श्याम वर्मा ने बताया कि दुकानदार के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का मुकदमा दायर हो चुका है। 

वर्ष 2010 से गिरासू भवनों में कनाट प्लेस 
एलआईसी का यह भवन वर्ष-2010 से गिरासू भवनों की सूची में शामिल है। यहां हर वर्ष बरसात में किसी न किसी भवन का कुछ हिस्सा टूट जाता है। बावजूद इसके दुकानदार और रिहायशी फ्लैटों में शामिल लोग यहां से जाने को तैयार नहीं हैं। 


यह है पूरा मामला 
भवन में 200 से ज्यादा रिहायशी और वाणिज्यिक संपत्तियां हैं। इन पर 50 सालों से लोग बेहद कम किराए पर काबिज हैं। किसी का किराया 40 रुपये है तो किसी का 54 रुपये। अधिकतम किराया 138 रुपये है। ऐसे में वर्ष 2002 में एलआईसी ने इस किराए को बढ़ाने को कहा था। लेकिन इसके लिए कोई कब्जेदार राजी नहीं हुआ। इस पर एलआईसी ने एलआईसी के स्टेट ऑफिसर कोर्ट में वाद दायर किया। वहां से किराएदार केस हार गए। मामला एडीजीके कोर्ट में पहुंचा। यहां से भी किराएदारों के हाथ मायूस लगी। वर्ष 2017 में एडीजे कोर्ट ने उन्हें अनाधिकृत कब्जेदार बताकर संपत्तियां खाली करने को कहा है।

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