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पढ़िए, सबसे बड़े चुनाव में उत्तराखंड को क्या मिला?

Thu, 15 May 2014 08:30 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 15 May 2014 08:30 PM IST
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flashback general election 2014 and uttarakhand

लोकसभा चुनाव 2014 के लिए 5 मार्च को आचार संहिता लागू होने के साथ ही उत्तराखंड में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गईं थी।

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भाजपा हो या कांग्रेस हर पार्टी में टिकट की दावेदारी को लेकर घमासान दिखाई देने लगा। उत्तराखंड में इस चुनाव की सबसे बड़ी घटना तब हुई जब सतपाल महाराज ने पाला बदलले हुए कांग्रेस से बीजेपी का दामन थाम लिया। हालांकि इस कारण उनकी पत्नी अमृता रावत को चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस पार्टी में उपेक्षा झेलनी पड़ी।

वहीं बीजेपी में हर तरफ मोदी लहर पर सवार भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की सूची जारी की तो दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने योद्घाओं के नाम जारी करने में काफी देर लगाई।
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जबकि दलितों के बारे में की गई टिप्पणी के कारण बाबा रामेदव अपने ही गढ़ में नरेंद्र मोदी और निशंक का प्रचार नहीं कर सके।

टिकट न मिलने को लेकर भाजपा में भी कम हाहाकार नहीं मचा। पार्टी के कद्दावर नेता मदन कौशिक और बची सिंह रावत टिकट न मिलने से काफी आहत दिखाई दिए।

इसके साथ ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी भी लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए आतुर दिखे।

सतपाल के जाने से कांग्रेस को लगा तगड़ा झटका

flashback general election 2014 and uttarakhand

हरीश रावत के सीएम बनने के बाद से ही गुस्साए सतपाल महाराज ने बीजेपी का दामन थाम कर कांग्रेस को बड़ा झटका दिया।

हालांकि उन्होंने पार्टी छोड़ने का कारण उत्तराखंड की लगातार हो रही उपेक्षा को बताया। इस दौरान भाजपा नेताओं ने सतपाल महाराज का जोरदार स्वागत किया। जो कल तक भाजपा को कोसते थे वह अब मोदी के साथ मंच पर दिखाई दिए। महाराज के भाजपा में शामिल होने के सा‌‌थ ही उनकी पत्नी अमृता रावत को कांग्रेस में उपेक्षा झेलनी पड़ी।

सतपाल महाराज के बाद कांग्रेस के लिए दूसरा बड़ा झटका बने पूर्व कैबिनेट मंत्री व पुराने दिग्गज मातबर सिंह कंडारी। वह टिहरी उप-चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे और इस बार फिर भाजपा में शामिल हो गए। कंडारी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मुलाकात की और भाजपा में शामिल हो गए।

एनडी ने कांग्रेस को खूब कोसा

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उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव के मतदान का काउंटडाउन शुरू होते ही पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के दौरे ने कांग्रेस के संभावित दावेदारों और संगठन के भीतर हलचलें बढ़ी दी।

लोकसभा चुनाव में एनडी तिवारी ने अपने बयानों से नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय सीट को खबरों में बनाए रखा।

कभी पूर्व मुख्यमंत्री एवं वयोवृद्ध नेता नारायण दत्त तिवारी के निर्दलीय चुनाव लड़ने की खबरें आई तो कभी वह मुलायम सिंह का साथ देते दिखाई दिए।

एनडी तिवारी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने की खबर से कांग्रेस में हड़कंप मच गया। वहीं वोटों का ध्रुवीकरण होने के डर कांग्रेस को सताता रहा। इतना ही नहीं कांग्रेस आलाकमान भी एनडी तिवारी को लेकर परेशान रहे।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खुद कहा कि यदि नारायण दत्त तिवारी सपा में शामिल होना चाहते हैं तो उनका तहे दिल से स्वागत है।

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टिकट के लिए भाजपा में पड़ी फूट

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लोकसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी को लेकर उत्तराखंड में भाजपाइयों के बीच में भी फूट दिखाई दी।

नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा सीट से दावेदारी में नाम शामिल नहीं किए जाने से नाराज भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री बची सिंह रावत ने प्रदेश संसदीय बोर्ड सदस्य समेत सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।

इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश अध्यक्ष समेत वरिष्ठ नेताओं ने उनकी दावेदारी को नजरअंदाज किया। लिहाजा, वो अपने सभी पदों से इस्तीफा देकर पार्टी में बतौर कार्यकर्ता के रूप में सेवा करते रहेंगे।

लोकसभा टिकट की होड़ में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से मात खाए भाजपा विधायक मदन कौशिक के बगावती तेवर कम नहीं हुए।

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए प्रदेश भाजपा प्रभारी राधा मोहन सिंह ने नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और प्रदेश महामंत्री संगठन संजय कुमार के साथ मदन कौशिक के घर पर बंद कमरे में मुलाकात भी कराई।

मुलाकात के बाद राधा मोहन ने जहां कहा कि मदन कौशिक नाराज नहीं हैं, वहीं कौशिक ने भी कहा कि वह भाजपा के सिपाही हैं।

इतना ही नहीं मदन कौशिक समर्थकों ने रमेश पोखरियाल निशंक का पुतला फूंककर अपने इरादे भी जाहिर किए।

कांग्रेस ने सबसे अंत में खोले अपने पत्ते

flashback general election 2014 and uttarakhand

कांग्रेस पार्टी लोकसभा चुनावों में अपने उम्मीदवारों का नाम घोषित करने में काफी पीछे रही। उम्मीदवारों के नामों पर मंथन के लिए मुख्यमंत्री हरीश बार-बार दिल्ली गए।

पहली बार मुख्यमंत्री उन नामों के साथ लौटे हैं, जिन पर पहले से कोई विवाद नहीं था और तय माने जा रहे थे।

प्रदेश के कांग्रेसी टिकटों पर दिल्ली में लगी 12वीं पंचायत के बाद यह तय हुआ कि जिन उम्मीदवारों के नाम तय हैं, उनकी घोषणा तत्काल कर दी जाए।

पहली लिस्ट में कांग्रेस ने नैनीताल से केसी सिंह बाबा और अल्मोड़ा से प्रदीप टम्‍टा का नाम फाइनल किया।

इसके कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की। ‌जिसमें टिहरी से साकेत बहुगुणा, पौड़ी से हरक सिंह रावत और ‌हरिद्वार से रेणुका रावत का नाम तय हुआ है।

हरिद्वार सीट के लिए कांग्रेस ने हरीश रावत के परिवार के अलावा किसी अन्य हैवीवेट उम्मीदवार की तलाश करती रही। लेकिन अंततः कांग्रेस को हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत का ही नाम फाइनल करना पड़ा।

टिकट को लेकर जिस तरह का द्वंद्व और हंगामा मचा उसने कांग्रेस पार्टी की खूब फजीहत भी कराई। आलाकमान और तय उम्मीदवारों के लगातार दबाव ने मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के पसीने छुड़ा दिए।

मुख्यमंत्री आपदा से जुड़ा कामकाज छोड़ टिकट को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली के चक्कर लगाते रहे।

उधर उत्तराखंड में भाजपा ने होली से पहले नामों की घोषणा कर दी थी। हालां‌कि इस दौरान टिकटों को लेकर भाजपा में भी काफी घमासान मचा था।

भाजपा के प्रचार से गायब रहे बाबा रामदेव

flashback general election 2014 and uttarakhand

पहली बार अपने मंच से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताने वाले बाबा रामदेव ही लोकसभा चुनाव के दौरान हरिद्वार से गायब रहे।

दलित संबंधी अपनी टिप्पणी के कारण न तो वह उत्तराखंड में मोदी लहर का गुणगान कर पाए और न ही अपने पसंदीदा उम्मीदवार रमेश पोखरियाल निशंक का प्रचार।

दलितों पर की गई उनकी टिप्पणी के कारण उत्तराखंड के दलित समाज ने उनका बायकॉट कर दिया। इससे भले ही बीजेपी के वोट बैंक पर ज्यादा असर न पड़ा हो, लेकिन मोदी के लिए उत्तराखंड में प्रचार करना रामदेव के लिए महज सपना बनकर रह गया।

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