उत्तराखंड: चाय पत्ती घोटाले में तीन लोगों को पांच-पांच साल की सजा, लगाया डेढ़ लाख का जुर्माना
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गुरुवार को हरिद्वार बीएचईएल कैंटीन में हुए चाय पत्ती घोटाले में दोषी करार देते हुए सीबीआई कोर्ट ने तीन दोषियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई है। सीबीआई स्पेशल न्यायधीश सुनीता सिंह की अदालत ने तीनों पर जुर्माना भी लगाया है। तीनों आरोपियों पर 1 लाख 46 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।
सीबीआई के अधिवक्ता ने बताया है कि 2008 ने बीएचईएल में चाय पत्ती घोटाला सामने आया था। सीबीआई ने इस मामले में खुद 17 जुलाई 2009 में मुकदमा दर्ज किया था। आरोप था कि बीएचईएल कैंटीन के डीजीएम जीबी गोयल, स्टोर इंचार्ज बी एस राणा और चाय पत्ती सप्लायर अनुराग गुप्ता ने मिली भगत कर चाय पत्ती के बिलों में घोटाला किया।
आरोप है कि 250 ग्राम चाय पत्ती के पैकेट को एक किलो का दर्शाते हुए बिल पास कराने के लिए फाइनेंस डिपार्टमेंट को भेज दिया गया। इस मामले चाय पत्ती के 576 पैकेट की धांधली उजागर हुई। फाइनेंस डिपार्टमेंट ने बिल पर ऑब्जेक्शन उठाया।
सीबीआई ने बीएचईएल की सुरक्ष में तैनात गेट स्टाफ का रजिस्टर खंगाला। जिसमे उजागर हुआ कि 250 ग्राम के 576 पैकेट सप्लाई किये गए। जिससे साफ हुआ कि 250 ग्राम के चाय पत्ती के पैकेट को एक-एक किलों का दिखाते हुए बिल बना दिया गया।
चाय पत्ती के पैकेट फरवरी 2008 से जून 2008 के बीच सप्लाई किये गए थे। बताया गया है कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान 19 गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष ने 5 गवाह पेश किए। जिसके बाद सीबीआई कोर्ट ने तीनों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल की सज़ा सुनाई।