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वीपीडीओ भर्ती: सचिव की पत्नी का घर किराये पर लेकर किए काले कारनामे, एक अभ्यर्थी से सात से आठ लाख में सौदा
Sun, 09 Oct 2022 08:22 AM IST
शाहरुख खान
रुद्रेश कुमार, अमर उजाला, देहरादून
रुद्रेश कुमार, अमर उजाला, देहरादून
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 09 Oct 2022 08:22 AM IST
सार
वीपीडीओ भर्ती घपले में नया खुलासा हुआ है। सचिव की पत्नी का घर किराये पर लेकर काले कारनामे किए गए थे। इसी घर में आयोग अध्यक्ष समेत सात लोगों की मौजूदगी में फाइनल रिजल्ट बनाया गया था। आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशन लि. कंपनी के सीईओ ने ओएमआर शीट की स्कैनिंग कराई थी।
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वीपीडीओ भर्ती घपले में गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वीपीडीओ भर्ती में धांधली के लिए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने सचिव एमएस कन्याल की पत्नी का घर किराये पर लिया था। इसी घर में अध्यक्ष, सचिव, परीक्षा नियंत्रक और कंपनी के सीईओ की मौजूदगी में ओएमआर शीटों को स्कैन कर फाइनल रिजल्ट तैयार किया गया। जिन अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए थे, उनकी ओएमआर शीटों में खाली गोलों को काला किया गया था।
कमरे में मौजूद सात लोगों में से पांच जेल जा चुके हैं जबकि दो को सरकारी गवाह बनाया जा चुका है। एसटीएफ की जांच में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। एसटीएफ के अनुसार, इस मामले में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. आरबीएस रावत मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं। रावत के कहने पर ही कन्याल ने आरएमएस कंपनी के सीईओ राजेश पाल से संपर्क किया था।
परीक्षा में किस प्रकार धांधली की जा सकती है, राजेश पाल ने इसकी पटकथा तैयार कर दी। रावत के कहने पर आयोग के नाम से पित्थूवाला स्थित एमएस कन्याल की पत्नी के नाम का घर किराये पर लिया गया। यहां दो कमरों को ऑफिस बनाया गया। आरोपियों ने पहले से ही लगभग 50 अभ्यर्थियों के रोल नंबर लिए थे। इस ऑफिस में रिजल्ट तैयार करने का काम शुरू हुआ। इनसे पहले ही कह दिया गया था कि अपनी-अपनी ओएमआर शीटों में गोले खाली रखने हैं।
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ओएमआर शीटों की स्कैनिंग से पहले इस ऑफिस में गोले काले किए गए। इस दौरान वहां आरबीएस रावत, एमएस कन्याल, आरएमएस कंपनी का सीईओ राजेश पाल, कर्मचारी विपिन बिहारी, परीक्षा नियंत्रक राजेश पोखरिया मौजूद थे। इनमें से अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक को शनिवार को जेल भेजा गया है। जबकि, सीईओ राजेश पाल और विपिन बिहारी पहले ही जेल जा चुके हैं। दो को एसटीएफ ने सरकारी गवाह बनाया है।
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कमरे में मौजूद सात लोगों में से पांच जेल जा चुके हैं जबकि दो को सरकारी गवाह बनाया जा चुका है। एसटीएफ की जांच में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। एसटीएफ के अनुसार, इस मामले में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. आरबीएस रावत मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं। रावत के कहने पर ही कन्याल ने आरएमएस कंपनी के सीईओ राजेश पाल से संपर्क किया था।
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परीक्षा में किस प्रकार धांधली की जा सकती है, राजेश पाल ने इसकी पटकथा तैयार कर दी। रावत के कहने पर आयोग के नाम से पित्थूवाला स्थित एमएस कन्याल की पत्नी के नाम का घर किराये पर लिया गया। यहां दो कमरों को ऑफिस बनाया गया। आरोपियों ने पहले से ही लगभग 50 अभ्यर्थियों के रोल नंबर लिए थे। इस ऑफिस में रिजल्ट तैयार करने का काम शुरू हुआ। इनसे पहले ही कह दिया गया था कि अपनी-अपनी ओएमआर शीटों में गोले खाली रखने हैं।
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ओएमआर शीटों की स्कैनिंग से पहले इस ऑफिस में गोले काले किए गए। इस दौरान वहां आरबीएस रावत, एमएस कन्याल, आरएमएस कंपनी का सीईओ राजेश पाल, कर्मचारी विपिन बिहारी, परीक्षा नियंत्रक राजेश पोखरिया मौजूद थे। इनमें से अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक को शनिवार को जेल भेजा गया है। जबकि, सीईओ राजेश पाल और विपिन बिहारी पहले ही जेल जा चुके हैं। दो को एसटीएफ ने सरकारी गवाह बनाया है।
सात से आठ लाख में हुआ एक अभ्यर्थी से सौदा, पैसे कन्याल ने लिए
इस परीक्षा में एक अभ्यर्थी से सात से आठ लाख रुपये का सौदा हुआ था। नकल सिंडीकेट के कहने पर सभी कन्याल से मिले थे। इनमें से कई ने पैसे कन्याल को उनके घर पर दिए जबकि कुछ ने कार में दिए। आरएमएस कंपनी का मालिक राजेश चौहान भी आयोग के इस दफ्तर में कई बार आता-जाता रहता था। कन्याल के खिलाफ कई अभ्यर्थियों ने कोर्ट में भी बयान दर्ज कराए हैं।
एक ही गांव के 20 से ज्यादा अभ्यर्थियों को किया गया था पास
ऊधमसिंह नगर इस परीक्षा में धांधली के गढ़ के रूप में सामने आया है। जिले के एक गांव के 20 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने इस सिंडीकेट को पैसे दिए थे। इन सबको पास कराया गया। इनमें से कई टॉपर भी बने। लेकिन, जब परिणाम रद्द कर परीक्षा दोबारा कराई गई तो इनकी पोल खुल गई। पहले टॉपर बने अभ्यर्थी सबसे नीचे आ गए थे। इन सब अभ्यर्थियों के बयान एसटीएफ दर्ज कर चुकी है।
एक ही गांव के 20 से ज्यादा अभ्यर्थियों को किया गया था पास
ऊधमसिंह नगर इस परीक्षा में धांधली के गढ़ के रूप में सामने आया है। जिले के एक गांव के 20 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने इस सिंडीकेट को पैसे दिए थे। इन सबको पास कराया गया। इनमें से कई टॉपर भी बने। लेकिन, जब परिणाम रद्द कर परीक्षा दोबारा कराई गई तो इनकी पोल खुल गई। पहले टॉपर बने अभ्यर्थी सबसे नीचे आ गए थे। इन सब अभ्यर्थियों के बयान एसटीएफ दर्ज कर चुकी है।