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पांचवें दिन की गई देवी के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 12 Apr 2016 12:49 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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नवरात्र के पांचवें दिन मंदिरों में देवी के स्कंदमाता स्वरूप का पूजन किया गया। सोमवार से कालिका भवन में त्रि-शक्ति सम्मेलन की शुरुआत हुई। मंदिरों में सुबह-शाम देवी की विशेष आरती एवं भजन-कीर्तन किए गए।
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भवन श्री कालिका माता मंदिर
कालिका मार्ग स्थित भवन श्री कालिका माता मंदिर में आयोजित त्रि-शक्ति सम्मेलन में गुजरात, दिल्ली, कुरूक्षेत्र, हरिद्वार, ऋषिकेश आदि जगहों से साधु-संत पहुंचे हुए हैं। इस मौके पर संतो ने शक्ति तत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मानव जीवन अर्थ, धर्म, काम एवं मोक्ष के लिए मिला है, जो अनेक रूपों में शक्ति धारण कर स्नेह का संचार करता है। सर्वप्रथम जन्म देने वाली मां की सेवा करना ही इस जीवन का प्रमुख आधार होना चाहिए। इस मौके पर एनके दत्ता, विजय प्रकाश, रोशन लाल, विजेंद्र गोयल, नरेश मैनी, प्रतीक मैनी आदि उपस्थित थे।
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माता वैष्णों देवी गुफा मंदिर
टपकेश्वर स्थित माता वैष्णों देवी गुफा मंदिर में देवी के पांचवें स्वरूप का पूजन किया गया। इस मौके पर मैया खो गया मेरा दिल पहाड़ो में आदि भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। सुबह विशेष पूजा-अर्चना एवं दुर्गा-सप्तशती का पाठ किया गया। मंदिर के आचार्य बिपिन जोशी ने बताया कि सोमवार को थलीसैंण पौड़ी के सौ वर्षीय जगत सिंह रावत मंदिर पहुंचे। उनके साथ उनकी 40 वर्षीय पोती शोभा भी थी। जगत सिंह ने मंदिर में पूजा-अर्चना की। मंदिर की ओर से बुजुर्ग को चुनरी-फल आदि देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पंडित अरविंद नौटियाल, दीपेंद्र नौटियाल, आचार्य कुलदीप कुकरेती आदि उपस्थित थे।
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पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर
सहारनपुर चौक स्थित श्री पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर में 108 रविंद्रपुरी के सानिध्य में मां भगवती की पूजा-अर्चना की गई। इस मौके पर दुर्गा-सप्तशती के पाठ भी किए गए। इस अवसर पर कन्या भ्रूण हत्या रोके जाने पर जोर दिया गया। शाम को भजन-कीर्तन किए गए। इस मौके पर सेवादार संजय गर्ग ने बताया कि बाला जी यात्रा के लिए पवित्र ज्योत मेहंदीपुर राजस्थान से लाई गई है, जिसका स्वागत मंगलवार को बैंड-बाजों के साथ किया जाएगा।
प्राचीन श्री शिव मंदिर
धर्मपुर चौक स्थित प्राचीन श्री शिव मंदिर में नवरात्र के उपलक्ष्य में श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर डॉ. शोभाराम उनियाल ने प्रवचन देते हुए कहा कि भगवान बिना पैर के चलते हैं, बिना कानों के सुन लेते हैं। बिना जीभ के सभी रसों का भोग कर लेते हैं। बिना वाणी के सबसे बड़े वक्ता हैं। भगवान किस रूप में अपना काम करते हैं, हमें पता ही नहीं चलता।
यहां भी खास
हाथीबड़कला स्थित काली मंदिर में मां भगवती का विशेष श्रृंगार किया गया। पंडित विजेंद्र प्रसाद पैन्यूली ने बताया कि नवरात्र में दैनिक सप्तशती पाठ किया जा रहा है। चंद्रबनी स्थित नवदुर्गा काली मंदिर में विशेष पूजन किया गया। कांवली रोड स्थित शिव-पार्वती मंदिर में भजन-कीर्तन किए गए। इंदिरापुरम स्थित नर्मदेश्वर मंदिर में विशेष पूजन हुआ। पंडित ज्ञानेंद्र पांडे ने बताया कि प्रतिदिन दुर्गा-सप्तशती के पाठ एवं विशेष आरती की जा रही है।