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रक्षा क्षेत्र में एफडीआई से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 11 Jul 2014 01:52 AM IST
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रक्षा उत्पादन क्षेत्र में एफडीआई 49 फीसदी करने से हथियारों की खरीद के लिए विदेशों पर आत्मनिर्भरता कम होगी। सरकार के इस फैसले से रक्षा क्षेत्र में होने वाले डीआरडीओ जैसे शोध संस्थान पर भले कम असर पड़े लेकिन आयुध निर्माणियां सहित उत्पादन से जुड़े अन्य सार्वजनिक उपक्रम प्रभावित होंगे।
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इससे उत्पादन क्षेत्र में बढ़ने वाली प्रतिस्पर्धा आयुध निर्माणियों के लिए बड़ी चिंता है। रक्षा क्षेत्र संस्थानों के कर्मचारी संगठन एफडीआई के विरोधी रहे हैं, जो इस फैसले के विरोध में लामबंद हो सकते हैं।
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सरकारी संस्थानों को करना होगा अपग्रेड
रक्षा उत्पादन क्षेत्र में एफडीआई लाने आने से विदेशों से हथियार खरीद कम होने की संभावना तो बढ़ेगी, लेकिन अनुसंधान और विकास से जुड़े सरकारी संस्थानों को समय रहते अपग्रेड करना होगा।
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जानकारों का कहना है कि रक्षा उत्पादन क्षेत्र बेहद संवेदनशील विषय है, जिसके लिए सरकारी उपक्रमों पर निर्भरता को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।
विदेशी निवेश होने से प्राइवेट कंपनियां तेजी से विस्तारीकरण करेंगी, जबकि सरकारी संस्थान इससे पिछड़ सकते हैं।
कर्मचारी संगठन होंगे सक्रिय
केंद्र के रक्षा उत्पादन सेक्टर में एफडीआई बढ़ाने से राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे की बात करने वाले कर्मचारी संगठन दोबारा सक्रिय हो जाएंगे।
एक एसोसिएशन के पदाधिकारी ने बताया कि विभिन्न संगठनों की राष्ट्रीय कार्यकारणियां इसको लेकर जल्द बैठक बुला रही है।