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पिता वृक्ष के रूप में चाहते थे पुनर्जन्म, बेटियों ने पूरा किया संकल्प

Wed, 27 Nov 2019 04:57 AM IST
देहरादून ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Wed, 27 Nov 2019 04:57 AM IST
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Father wanted rebirth as tree, daughters fulfilled resolve
पिता के संकल्प को उनकी बेटियों ने पूरा किया - फोटो : अमर उजाला

पूर्व गृह सचिव व वर्ष 1984 में दिल्ली के उप राज्यपाल रहे मदन मोहन किशन वली नहीं चाहते कि उनके अंतिम संस्कार के बाद उनकी राख को गंगा में प्रवाहित किया जाए। वह वृक्ष के रूप में पुनर्जन्म चाहते थे। पिता के इस संकल्प को उनकी बेटियों ने पूरा किया।

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उन्होंने मंगलवार को शुक्लापुर स्थिति हैस्को ग्राम पहुंचकर पिता की राख को मिट़्टी में मिलाकर बेर और आडू के पौधे लगाए। हैस्को में इसी प्रकार अब तक 32 मृत लोगों की राख को मिट्टी में मिलाकर वृक्ष के रूप में स्थापित किया गया। किशन वली की बेटियों को भी यह प्रेरणा हैस्को से ही मिली थी।
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मंगलवार को स्व. मदन मोहन किशन वली की पुत्रियां अर्चना कौल, रेणुका वली व डॉ. चारू वली खन्ना और दामाद रंजन खन्ना उनकी राख लेकर हैस्को ग्राम पहुंचे। यहां बेर और आडू के पौधों का रोपण किया। उनकी पुत्रियों ने बताया कि उनके पिता चाहते थे कि उन्होंने जितना हवा, पानी व जंगल के संसाधनों को भोगा और जो भी वृक्षों से लेकर फलों के रूप में सेवन किया, वह सब समाज हो वापस कर सकें।
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इसलिए तीनों ने तय किया कि वह अपने पिता को वृक्ष के रूप में देखें। इस संकल्प को पूरा करने में हैस्को के संस्थापक डॉ. अनिल जोशी का बड़ा योगदान रहा। कहा कि वह इन पौधों के रूप में जुड़ी यादों में अपने पिता के दर्शनों के लिए समय-समय पर आती रहेंगी।

इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि जब हम अपनी मृत्यु से पहले अपने शरीर के विभिन्न अंगों को दान करने का निर्णय ले लेते हैं तो क्यों नहीं हम ये भी तय कर पाते हैं कि हम अपने अंतिम अवशेषों को वृक्ष के रूप में इस धरती को वापस लौटाएं। जितना हमने जीवन में प्रकृति से लिया है, उसको वापस लौटाने का सरल तरीका है कि मृत्यु से पहले हम अपनी वसीयत लिख दें।


जिसमें हम अपने परिवार के लोगों को कहें कि मेरा अगला जन्म आप लोग तय कर सकते हो। मेरे अंतिम अवशेष राख को मिट्टी में मिलाकर वृक्ष का रूप दोगे तो मैं उसमें जीवित रहूंगा और समाज की अनवरत सेवा करता रहूंगा। सबसे बड़ी पुत्री अर्चना कौल ने कहा कि वे चाहती हैं कि उनके पिता यहां वृक्ष के रूप में रहें। उनके पिता को प्रकृति से बहुत प्रेम था, इसलिए उन्होंने तय किया था कि वह मृत्यु के बाद प्रकृति के साथ रहें।

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