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नहीं आई एंबुलेंस तो घायल बेटे को पीठ पर लादकर तीन किलोमीटर पैदल चला ग्रामीण, ऐसे पहुंचाया अस्पताल 

Wed, 24 Apr 2019 09:08 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागेश्वर Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 24 Apr 2019 09:08 AM IST
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Father carry son on his back and walked for admit in hospital in bageshwar

उत्तराखंड के बागेश्वर में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल तो हैं ही, अब चिकित्साकर्मी भी असंवेदनशील हो गए हैं। कपकोट के गांव रिखाड़ी में पहाड़ी से गिरे किशोर को अस्पताल लाने के लिए पिता ने जब 108 सेवा को फोन किया तो उन्होंने असमर्थता जताते हुए रिखाड़ी तक आने से मना कर दिया। इस पर पिता ने बेटे को पीठ पर लादा और तीन किमी पैदल चलकर बाबे बैंड तक लाया। उसके बाद पिकअप से सौंग लाया, जहां से 108 एंबुलेंस से कपकोट अस्पताल लाया जा सका।

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सोमवार को रिखाड़ी निवासी चंचल राम का 15 वर्षीय पुत्र नीरज कुमार आर्य पहाड़ी से गिरकर घायल हो गया था। उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का इंतजाम नहीं हो पाया। पिता चंचल राम ने बताया कि उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए जब 108 को फोन किया तो उसने वाहन में तेल न होने और वाहन के खराब होने की बात कहकर रिखाड़ी तक आने से इनकार कर दिया।
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बाद में गुजारिश करने के बाद एंबुलेंस कपकोट से सौंग पहुंची। चंचल राम ग्रामीणों की मदद से नीरज को बाबे बैंड तक पीठ पर और वहां से पिकअप से सौंग तक लाए। उसके बाद यहां से 108 एंबुलेंस से कपकोट लेकर पहुंचे।

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रेफर किया, एंबुलेंस नहीं दी

कपकोट में नीरज का प्राथमिक उपचार किया गया। हाथ में फ्रैक्चर होने और मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल बागेश्वर के लिए रेफर तो कर दिया लेकिन एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं कराई। नीरज के पिता चंचल राम ने प्राइवेट टैक्सी किराए पर ली तब जाकर वह बागेश्वर अस्पताल पहुंचे।

108 एंबुलेंस की हड़ताल चल रही है। 108 सेवा दूसरी कंपनी के हाथों में जा रही है, जिससे कुछ दिक्कतें हैं। रिखाड़ी के नीरज को एंबुलेंस नहीं मिलना गंभीर मामला है। मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं था। अन्यथा परिवार को प्राइवेट कार की व्यवस्था नहीं करनी पड़ती। विभाग से ही उन्हें एंबुलेंस मिल जाती। अब भी यदि नीरज को हायर सेंटर जाना होगा तो विभागीय एंबुलेंस मुहैया कराई जाएगी। 
- डॉ. जेसी मंडल, सीएमओ बागेश्वर 

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