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यहां किसानों की हो गई बल्ले-बल्ले, मिल गया बे-मौसमी धान की फसल का विकल्प

Sat, 27 May 2017 12:52 PM IST
कुंदन शाह/ अमर उजाला, काशीपुर
कुंदन शाह/ अमर उजाला, काशीपुर Updated Sat, 27 May 2017 12:52 PM IST
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farmers found the option of Bay seasonal paddy in kashipur
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बे-मौसमी धान की फसल को भू-जल स्तर गिरने का कारण माना जाता है। इसके लिए सरकार इस फसल पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। इस बीच काशीपुर के किसानों को बे-मौसमी धान की फसल का विकल्प मिल गया है।

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आरटीमीशिया की फसल किसानों की अतिरिक्त आय का जरिया बन गई है। किसान अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में खटीमा विकासखंड के खैरना गांव के किसानों ने इसका उत्पादन शुरू कर दिया है।
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बेमौसमी धान का उत्पादन पूरे देश में तेजी से बढ़ रहा है। इसके उत्पादन में पानी काफी खर्च होता है। भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है, जिसके लिए सरकार और वैज्ञानिकों ने समर पैडी को जिम्मेदार माना है। कई सरकारें इसके उत्पादन पर रोक लगाने पर विचार कर चुकी हैं।

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मध्यप्रदेश की कंपनी ने खोज निकाला विकल्प

farmers found the option of Bay seasonal paddy in kashipur
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अब मध्य प्रदेश की कंपनी आईपीसीए ने इसका विकल्प खोज निकाला है। इसके लिए आरटीमीशिया नामक पौधे का उत्पादन किया जा रहा है। इसकी खेती बेमौसमी धान के समय पर ही होती है। ऊधमसिंह नगर में खटीमा तहसील के खैरना गांव के किसानों ने आरटीमीशिया का सफल उत्पादन शुरू कर दिया है।

इसकी पौध 10 मार्च तक डाली जाती है। फसल जून के पहले सप्ताह में काटी जाती है। आईपीसीए कंपनी आरटीमीशिया के उत्पादन के लिए किसानों से एग्रीमेंट करती है। तय मूल्य पर ही उत्पादक किसानों को भुगतान किया जाता है। किसानों को जितनी आय बेमौसमी धान का उत्पादन करने में होती है, उससे अधिक आरटीमीशिया का उत्पादन में होता ।

कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. सी तिवारी ने बताया कि कंपनी किसानों को बीज देती है। किसान आरटीमीशिया की पत्तियां तोड़कर  सुखाते हैं। तब कंपनी पत्तियां ले जाती है। पत्तियों से आरटीकीनन-201 नामक तेल निकलता है, जिससे मलेरिया की दवा बनती है। खटीमा में यह दूसरे वर्ष तैयार हो रही है।

किसानों को मिलेगा उचित सुझाव व मार्ग दर्शन

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कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. सी तिवारी ने कहा आरटीमीशिया के संबध में कृषि विज्ञान केंद्र काशीपुर से संपर्क कर सकते है। किसानों को उचित सुझाव व मार्ग दर्शन दिया जाएगा।

खमीमा के खैरना गांव के प्रगतिशील किसान सुरेश राणा ने बताया उसने आरटीमीशिया फसल बोई है। इसकी पत्तियां प्रति एकड़ 15 क्विंटल होती है। कंपनी किसान को प्रति क्विंटल 3500 रुपये देती है। किसान को आय प्रति एकड़ लगभग 35 हजार रुपये होती है। आरटीमीशिया की फसल उगाने के लिए इसकी पौध फरवरी-मार्च में डाली जाती है।

पौध तैयार होने पर रोपा जाता है। जो जून पहले सप्ताह तक काटी जाती है। इसका बीज काफी बारीक होता है। एक एकड़ में 100 ग्राम लगता है। उनके गांव में आठ किसान आरटीमीशिया की फसल उगा रहे हैं। 

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