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Dehradun News: रबी की फसलों की बुआई से किसानों का हट रहा मोह

Mon, 16 Dec 2024 12:06 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 16 Dec 2024 12:06 AM IST
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Farmers are losing interest in sowing Rabi crops
Iगेहूं का रकबा करीब 175 हेक्टेयर तक कम रहने की जताई जा रही संभावना
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Iजौ, मसूर, चना और सरसों के क्षेत्रफल में भी आई कमीI
Iरबी सीजन की प्रमुख फसलों की बुआई को लेकर राजधानी के किसानों का लगातार मोह भंग हो रहा है। जिले में इस बार गेहूं की बुआई कम हुई है। चना, जौ, सरसो व मसूर के क्षेत्रफल में भी कमी आ गई है। इसका कारण खेती योग्य भूमि में प्लॉटिंग, दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन को माना जा रहा है। इसके अलावा आगामी वर्षों में फसलों के रकबे में ओर कमी आने संभावना बनने लगी है।I
Iविभागीय अधिकारियों ने बताया कि जिले के लगभग सभी विकासखंडों में रबी सीजन की फसलों की बुआई की जाती है। इनमें जौ, चना, सरसो और मसूर की बुआई किसान लगभग कर चुके हैं, जबकि गेहूं की बुआई फिलहाल भी चल रही है। अधिकारियों ने बताया कि जिले में बीते दो वर्षों में गेहूं फसल का क्षेत्रफल 15 हजार हेक्टेयर से ज्यादा रहा है लेकिन इस बार इसके घटने का अनुमान है।
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Iवहीं अभी तक जिले में 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बुआई हो चुकी है। जबकि अभी 25 दिसंबर तक गेहूं की बुआई होगी। संभावना जताई जा रही है कि दिसंबर माह की बुआई से गेहूं का आंकड़ा 1325 हेक्टेयर के आसपास रहने की संभावना है।I
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Iसहसपुर और डोईवाला में खेतों में खड़ा है अभी गन्ना
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Iविभागीय अधिकारियों ने बताया कि सहसपुर और डोईवाला में अभी गेहूं की फसल की बुआई होगी। यहां खेतों से पैडी गन्ने को काटकर मिल को आपूर्ति की जा रही है। इसमें अभी समय लग रहा है। गन्ने से खेत खाली होने के बाद किसान गेहूं की बुआई करेंगे।
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Iचना, सरसो, जौ और मसूर भी हुई कम
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Iजिले में सरसों का रकबा 664 हेक्टेयर के आसपास रहता है, लेकिन इस बार इसमें कमी आ गई है। जिले में इस बार 520 हेक्टेयर पर सरसो की बुआई की गई है। जबकि चना 10 से घटकर आठ, जौ 400 से घटकर 370 और मसूर की बुआई 550 हेक्टेयर में की गई है। जबकि पिछले साल मसूर का क्षेत्रफल आठ सौ हेक्टेयर से ज्यादा रहा था।I
Iकाश्त की जमीन का कारोबारी क्षेत्रों और प्लॉटिंग में हो रहा इस्तेमाल
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Iकृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किसान खेती के साथ अन्य कारोबार करने को महत्व दे रहे हैं। खासकर सड़क के किनारे वाले जमीन में प्लॉटिंग, रेस्टोरेंट, दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। जिसका सीधा असर खेती की जमीन पर पड़ रहा है। इसके अलावा परंपरागत खेती के बजाय अन्य व्यावसायिक खेती को किसान ज्यादा महत्व दे रहे हैं।

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Iजोत की जमीन पर लगातार कारोबारी गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। कई क्षेत्रों में खेती की जमीन पर बड़े पैमाने पर प्लाॅटिंग की जा रही है। इससे लगातार खेती की जमीन कम हो रही है। -देवेंद्र कुमार राणा, मुख्य कृषि अधिकारी, देहरादूनI
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