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नोटबंदी की मार से किसान बेजार, कैसे बोएं गेंहू जब बीज ही नहीं मिला

Fri, 18 Nov 2016 02:49 AM IST
बिशन सिंह बोरा/अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 18 Nov 2016 02:49 AM IST
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farmer not getting seeds.
नकली नोट

प्रदेश में 2013-14 में आई दैवी आपदा के बाद अब 500 और 1000 के नोट बंद होने से अन्नदाता मुश्किल में हैं। वे गेहूं का बीज नहीं खरीद पा रहे हैं। इससे दून में ही 12 सौ कुंतल से अधिक गेहूं डंप हो गया है। आने वाले समय में उत्पादन पर भी इसका असर पड़ेगा। मुख्य कृषि अधिकारी ज्योति एस कुमार के मुताबिक बैंक चालान के जरिये पुराने नोट जमा नहीं कर रहे हैं। लिहाजा हमने भी पुराने नोट लेना बंद कर दिया है।

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प्रदेश में यह गेहूं बुआई का सबसे बेहतर समय है। धान की कटाई के बाद किसान अब गेहूं बुआई की तैयारी में है। इसके लिए तराई बीज विकास निगम और राष्ट्रीय बीज निगम की ओर से 40 हजार कुंतल से अधिक गेहूं किसानों को वितरित किया जाना है। किसानों को गेहूं के अलावा मसूर, तोड़िया और सरसों का बीज सब्सिडी पर दिया जाता है, लेकिन दून की 40 न्याय पंचायतों में किसानों को पुराने नोट पर बीज नहीं मिल पा रहा है।
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इसकी वजह बताई गई है कि कृषि विभाग से बैंक पुराने नोट नहीं ले रहे हैं। ऐसे में किसानों को पैसा होते हुए भी बीज नहीं मिल पा रहा है। इससे न्याय पंचायतों में बीज डंप पड़े हैं।

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farmer not getting seeds.
बीज - फोटो : getty images

मुख्य कृषि अधिकारी ज्योति एस कुमार ने कहा कि बीज से जमा होने वाला पैसा सरकारी खातों में जमा नहीं हो पा रहा है। बैंक पैसा जमा करने से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में अब हमने भी पुराने नोट पर किसानों को बीज देने से इनकार कर दिया है। 

दून में यह है स्थिति 
दून में 2060.40 कुंतल गेहूं, 34.80 कुंतल मसूर, 20.70 कुंतल तोड़िया और दो कुंतल सरसों का बीज आया है। जिसे समस्त 40 न्याय पंचायतों को वितरित किया गया है, न्याय पंचायतों से तोड़िया का बीज तो बिक चुका है, लेकिन गेहूं का मुश्किल से 40 फीसदी बीज का ही उठान हो सका है। 

गेहूं बीज हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में शत प्रतिशत उठ चुका है। अन्य जनपदों में जहां बीज का उठान नहीं हो पा रहा है वहां कर्मचारियों से इसकी रिकवरी की जाएगी। बैंकों में 24 नवंबर तक पैसा जमा हो सकता है।
-जीआर आर्य, कृषि निदेशक

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